बहराइच के उदावापुर और केदारपुरवा ग्राम सभा क्षेत्र में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कथा स्थल को फूल-मालाओं और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया था। कथावाचक गिरजा शंकर महाराज ने व्यास गद्दी से श्रीकृष्ण जन्म की कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कंस के अत्याचारों से पीड़ित वसुदेव-देवकी की प्रार्थना पर भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्य रात्रि को भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा के कारागार में अवतार लिया था। महाराज जी के “नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” उद्घोष के साथ ही पूरा पंडाल तालियों और जयकारों से गूंज उठा। मध्य रात्रि 12 बजे शंख और घंटों की ध्वनि के साथ भगवान का प्राकट्य हुआ। श्रद्धालुओं ने लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक किया, उन्हें नए वस्त्र पहनाए और पालने में झुलाया। इस दौरान महिलाओं ने सोहर और बधाई गीत गाए। जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में पंजीरी, माखन-मिश्री और फल का प्रसाद वितरित किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से गांव में भक्तिमय माहौल बनता है और नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है।
भागवत कथा के पांचवें दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव:कथावाचक गिरजा शंकर महाराज ने सुनाई कृष्ण जन्म कथा, श्रद्धालु झूमे।
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