लखनऊ। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित ‘ग्रीष्मकालीन संगीत एवं कला कार्यशाला’ का मंगलवार को विश्वविद्यालय परिसर में अत्यंत उत्साह एवं गरिमा के साथ शुभारंभ हुआ। एक माह तक संचालित होने वाली यह विशेष कार्यशाला 26 मई से 25 जून तक आयोजित की जा रही है। ये जानकारी डॉ0 सृष्टि धवन,कुलसचिव ने दी। उन्होंने बताया कार्यशाला में प्रतिभागी बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं उनके बढ़ते उत्साह एवं कला के प्रति रुचि को दर्शाता है।विशेष रूप से इस वर्ष सर्वाधिक आवेदन कथक नृत्य में प्राप्त हुए हैं,जिससे इस पारंपरिक नृत्य शैली के प्रति युवाओं एवं प्रतिभागियों का विशेष आकर्षण परिलक्षित होता है। इसमें सभी आयु वर्ग के प्रतिभागियों को भारतीय शास्त्रीय कलाओं की विविध विधाओं को सीखने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान कर रही है। इसके अंतर्गत शास्त्रीय संगीत,वादन, नृत्य एवं ललित कला की विभिन्न विधाओं में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कार्यशाला में भारतीय शास्त्रीय गायन, सुगम संगीत एवं लोकगीत के साथ-साथ तबला,पखावज, सितार, वायलिन, गिटार (वेस्टर्न),बांसुरी, हारमोनियम एवं की-बोर्ड जैसे वाद्य यंत्रों का प्रशिक्षण शामिल है। नृत्य विधाओं में कथक, भरतनाट्यम एवं लोकनृत्य तथा ललित कला के अंतर्गत पेंटिंग एवं क्ले मॉडलिंग (मिट्टी की कला) का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। विशेष रूप से ऑटिस्टिक एवं दिव्यांग बच्चों के लिए शास्त्रीय गायन की विशेष कक्षाओं का आयोजन इस कार्यशाला को समावेशी एवं प्रेरणादायक बनाता है। डॉ मनोज कुमार मिश्रा नें बताया कि इस प्रकार की कार्यशालाएं प्रतिभागियों को अपनी रचनात्मक क्षमता को पहचानने और उसे विकसित करने का सशक्त मंच प्रदान करती हैं। ऑटिस्टिक एवं दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष कक्षाओं की सराहना करते हुए,उन्होंने इसे समावेशी शिक्षा की दिशा में विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का परिचायक बताया। उन्होनें आशा व्यक्त की कि यह कार्यशाला प्रतिभागियों के लिए ज्ञानवर्धक सिद्ध होगी तथा उन्हें भारतीय सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जोड़ने में सहायक बनेगी।
भातखण्डे विवि में ग्रीष्मकालीन कार्यशाला का शुभारंभ
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