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बस्ती मेडिकल कॉलेज नशा मुक्ति केंद्र सफल:346 मरीज पहुंचे, 155 को नशे से मिली मुक्ति

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बस्ती के महर्षि वशिष्ठ स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध ओपेक हॉस्पिटल कैली का नशा मुक्ति केंद्र, नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए प्रभावी साबित हो रहा है। केंद्र की ओपीडी में अब तक 346 मरीज नशा छोड़ने के लिए पहुंचे हैं, जिनमें से 155 मरीजों को काउंसलिंग और उपचार के माध्यम से नशे से मुक्त किया गया है। केंद्र में मरीजों को केवल दवा ही नहीं, बल्कि काउंसलिंग और विशेषज्ञ डॉक्टरों की लगातार निगरानी के जरिए सामान्य जीवन में लौटने में मदद की जा रही है। यह उपचार प्रक्रिया तीन माह तक चलती है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में संचालित होती है। नशा मुक्ति विशेषज्ञ एवं विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंका केसरवानी और ओएम काउंसलर डॉ. अखिलेश त्रिपाठी की देखरेख में मरीजों को नशे की आदत से बाहर निकालने के लिए नियमित उपचार प्रक्रिया अपनाई जा रही है। विशेषज्ञ मरीज की स्थिति, उनकी दिनचर्या और नशे की आदत को समझने के बाद उपचार की रणनीति तैयार करते हैं। काउंसलिंग के दौरान मरीजों को नशे के दुष्प्रभावों और उससे होने वाले शारीरिक, मानसिक तथा सामाजिक नुकसान के बारे में जागरूक किया जाता है। नशे की लत से छुटकारा दिलाने में सबसे बड़ी चुनौती मरीज और उनके परिजनों को उपचार के लिए तैयार करना होता है। कई मरीज नशा छोड़ना चाहते हुए भी बारबार इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं। ऐसे मरीजों के लिए मेडिकल कॉलेज में काउंसलिंग को उपचार का अहम हिस्सा बनाया गया है। चिकित्सक मरीज से बातचीत कर नशे की शुरुआत के कारण, उसकी आदत और उससे जुड़ी परेशानियों को समझते हैं। इसके बाद उसे धीरेधीरे नशे से दूरी बनाने के लिए तैयार किया जाता है।
तीन माह तक डॉक्टरों की नजर फिर सामान्य जीवन की ओर कदम डां प्रियंका —
अभी तक 346 मरीज आए हैं जिसमें 121 अल्कोहल,200सौ तम्बाकू एवं स्मोकिंग,15 मरीज कोडिनया फिर नशे की गोली खाते थे , जिस मरीजों को उपचार से जोड़ने के बाद करीब तीन माह तक दवा और चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाता है। इस दौरान मरीज की स्थिति पर नजर रखी जाती है और जरूरत के अनुसार उपचार जारी रखा जाता है। नियमित काउंसलिंग से मरीजों में नशा छोड़ने का आत्मविश्वास पैदा किया जा रहा है। नशा केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं है। इसकी चपेट में आने वाला व्यक्ति धीरे धीरे परिवार और समाज से भी दूर होने लगता है। नशे के कारण स्वास्थ्य खराब होने के साथ आर्थिक और पारिवारिक परेशानियां भी बढ़ती हैं। ऐसे में समय रहते विशेषज्ञ से संपर्क करना बेहद जरूरी है। परिवार का साथ मिले तो आसान होगी नशे से जंग डा दिलीप वर्मा मानसिक रोग विशेषज्ञों का कहना है कि नशा छोड़ने की प्रक्रिया में परिवार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। मरीज को ताने देने या उससे दूरी बनाने के बजाय परिवार को उसका सहयोग करना चाहिए। लगातार प्रोत्साहन और चिकित्सकीय सलाह से मरीज के दोबारा नशे की ओर लौटने की आशंका को कम किया जा सकता है। डॉ. प्रियंका केसरवानी और डॉ. अखिलेश त्रिपाठी की देखरेख में चल रही नशा मुक्ति ओपीडी में मरीजों को उपचार के साथ मानसिक सहयोग भी दिया जा रहा है। 346 मरीजों का ओपीडी तक पहुंचना यह बताता है कि नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ रही है, जबकि 155 मरीजों की काउंसलिंग और उपचार से जुड़ना इस अभियान की अहम उपलब्धि है। मेडिकल कॉलेज की यह पहल नशे की गिरफ्त में फंसे लोगों के लिए एक ऐसा रास्ता तैयार कर रही है, जहां उन्हें बीमारी के साथ अकेले लड़ने के लिए नहीं छोड़ा जाता, बल्कि चिकित्सक, काउंसलर और परिवार मिलकर उन्हें सामान्य जीवन की ओर वापस लाने का प्रयास करते हैं। नशे के खिलाफ चल रही यह जंग सिर्फ मरीज को नशे से दूर करने तक सीमित नहीं, बल्कि उसे दोबारा परिवार और समाज की मुख्यधारा में लौटाने की कोशिश भी है।
#बस्ती न्यूज़ टुडे

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