केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। अब इस पूरे मामले में बोर्ड ने पहली बार स्वीकार किया है कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म में कुछ सुरक्षा कमजोरियां मौजूद थीं। यह बयान पहले के उन दावों से अलग है, जिनमें CBSE ने कहा था कि समस्या केवल गलत URL और टेस्टिंग पोर्टल की वजह से हुई थी, किसी साइबर सुरक्षा उल्लंघन की वजह से नहीं।
बोर्ड ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि उसके सर्विस प्रोवाइडर के OSM पोर्टल में सामने आई कमजोरियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। यह विवाद तब और गहरा गया जब छात्रों, तकनीकी विशेषज्ञों और एथिकल हैकर्स ने सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए।
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CBSE का बयान
CBSE ने एक्स एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, ‘हम अपने सर्विस प्रोवाइडर के OnMark पोर्टल में पाई जा रही कमजोरियों पर लगातार नजर रख रहे हैं, जिनकी चर्चा सार्वजनिक रूप से हो रही है। पिछले कुछ दिनों से सरकार के अलग-अलग विभागों और आईआईटी के साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स की एक टीम इस सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए काम कर रही है। इसमें सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट करना भी शामिल है।’
बोर्ड ने आग कहा, ‘जो खामियां मिली थीं, उन्हें अब कंट्रोल कर लिया गया है और बाकी संभावित कमजोरियों की भी जांच की जा रही है ताकि किसी तरह की और दिक्कत न रहे। हम उन सभी जागरूक नागरिकों और एथिकल हैकर्स का धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने ये खामियां बताईं। हमने उनमें से कुछ लोगों से सीधे संपर्क भी किया है। अगर किसी और के पास भी कोई जानकारी या सुझाव है, तो वे हमारी सिक्योरिटी टीम को इस ईमेल पर संपर्क कर सकते हैं: secy-cbse@nic.in’
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लगातार उठ रहे सवालों से बढ़ा विवाद
हाल ही में 19 वर्षीय एथिकल हैकर ने दावा किया था कि CBSE के AWS सर्वर पर कुछ संवेदनशील डेटा जैसे उत्तर पुस्तिकाएं और प्रश्न पत्र सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थे। वहीं एक 17 वर्षीय छात्र ने टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सुरक्षा मानकों में ढील दी गई, जिससे एक कंपनी को OSM का कॉन्ट्रैक्ट मिला। इन आरोपों के बीच CBSE ने स्पष्ट किया है कि वह पूरे सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए लगातार कदम उठा रहा है और किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक को रोकना उसकी प्राथमिकता है।












