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19 साल से कम उम्र में मां बनीं देश की 6.7 प्रतिशत महिलाएं, समझिए कितना है खतरा

भारत में लड़कियों की शादी 18 साल के बाद होनी चाहिए जबकि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 इससे अलग तस्वीर पेश करती है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2023-24 में 15 से 19 साल की 6.7 फीसदी लड़कियां गर्भवती हुई थीं। इससे कहीं न कहीं यह संकेत मिलता है कि कई लड़कियों की शादी 19 साल से कम उम्र में हुई। कम उम्र में बच्चे को जन्म देना न सिर्फ महिलाओं के लिए नुकसानदायक है, बल्कि बच्चे की सेहत के लिए भी चिंताजनक है। आंकड़ों के मुताबिक त्रिपुरा में 18.0 और पश्चिम बंगाल में 16.6 प्रतिशत महिलाओं ने 19 साल से कम उम्र में बच्चे को जन्म दिया है।

कम उम्र में मां बनने से महिलाएं हमेशा एक स्वस्थ बच्चे को जन्म नहीं दे पाती हैं, जिससे बच्चे का विकास धीमी रफ्तार से हो सकता है। इसके कारण बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में कठिनाई आ सकती है। साथ ही बच्चा कुपोषण का शिकार भी हो सकता है। सवाल उठता है कि किन राज्यों में कितने प्रतिशत महिलाओं की शादी कम उम्र में हुई।

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रिपोर्ट में क्या पता चला?

रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023-24 के बीच 20 फीसदी महिलाओं की शादी 18 साल से कम उम्र में हुई। इसी के परिणामस्वरूप कम उम्र की महिलाएं गर्भवती हुईं। हालांकि, पहले के आंकड़ों की तुलना में गिरावट आई है। जहां 2019-21 के बीच 6.8 फीसदी महिलाएं कम उम्र में गर्भवती हुई थीं, वहीं अब यह आंकड़ा 6.7 फीसदी पर आ गया है।

कहां ज्यादा खराब है स्थिति?

आंकड़ों के मुताबिक कम उम्र में गर्भवती होने वाली लड़कियों की संख्या पहले की तुलना में कुछ कम हुई है। हालांकि यह गिरावट बहुत राहत देने वाली नहीं है क्योंकि चिंता आज भी बरकरार है। कुछ राज्यों में सुधार आया है, जबकि कई राज्यों में अब भी बड़ी संख्या में कम उम्र की महिलाएं गर्भवती हो रही हैं।

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कम उम्र में महिलाओं का मां बनना यह संकेत देता है कि समाज में जागरूकता की कमी है। साथ ही आज भी कई लोग शिक्षा से वंचित हैं, जिस वजह से कई परिवार कम उम्र में लड़कियों की शादी करा देते हैं। इसी कारण महिलाएं कम उम्र में मां बन जाती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि किस राज्य में कितनी फीसदी महिलाओं की कम उम्र में शादी हुई।

Photo Credit- ChatGGT, Data: NFHS-6

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कम उम्र में मां बनने के जोखिम

1. डिप्रेशन

जो महिलाएं कम उम्र में मां बनती हैं, उन्हें प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल असंतुलन का सामना करना पड़ सकता है। इससे महिलाओं को डिलीवरी के बाद या प्रेग्नेंसी के दौरान डिप्रेशन का सामना करना पड़ सकता है।

2. कमजोरी

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में आयरन की कमी हो सकती है, जिससे कमजोरी महसूस होती है।

3. प्रीमेच्योर डिलीवरी

जो महिलाएं कम उम्र में गर्भवती होती हैं, उन्हें प्रीमेच्योर डिलीवरी का सामना करना पड़ सकता है, जो मां और बच्चे दोनों के लिए हानिकारक हो सकती है।

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