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किसान बनकर पहुंचे उप कृषि निदेशक, ओवररेट पर यूरिया बेचने वाला विक्रेता रंगे हाथों पकड़ा, दुकान-गोदाम सील

प्रतापगढ़। जनपद में किसानों को निर्धारित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए कृषि विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश शासन एवं जिलाधिकारी के निर्देशों के क्रम में उप कृषि निदेशक अश्विनी कुमार सिंह ने शुक्रवार को तहसील पट्टी क्षेत्र के बंधवा बाजार स्थित उर्वरक प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान एक उर्वरक विक्रेता द्वारा निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर यूरिया बेचने का मामला सामने आने पर उसके प्रतिष्ठान एवं गोदाम को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया।
उप कृषि निदेशक अश्विनी कुमार सिंह अपने कार्यालय के कर्मचारी ध्रुव कुमार प्रजापति के साथ किसान बनकर मेसर्स मातासरन खाद बीज भंडार पहुंचे। उन्होंने विक्रेता से यूरिया उर्वरक खरीदने की इच्छा जताई, जिस पर विक्रेता ने प्रति बोरी यूरिया का मूल्य 340 रुपये बताया। इसके बाद उप कृषि निदेशक ने अपना वास्तविक परिचय देते हुए प्रतिष्ठान का विस्तृत निरीक्षण किया। जांच के दौरान अधिक मूल्य पर उर्वरक बिक्री की शिकायत सही पाई गई। साथ ही प्रतिष्ठान पर उपलब्ध उर्वरक का भौतिक स्टॉक पीओएस मशीन में दर्ज विवरण से अलग पाया गया। गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए संबंधित प्रतिष्ठान एवं गोदाम को मौके पर ही सील कर दिया गया। जिलाधिकारी की अनुमति के उपरांत संबंधित विक्रेता के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
कृषि विभाग की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र के अधिकांश उर्वरक विक्रेताओं ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए। ऐसे प्रतिष्ठानों को चिन्हित कर जिला कृषि अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा जा रहा है। उप कृषि निदेशक अश्विनी कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनपद में उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का लगातार निरीक्षण किया जाएगा और जहां भी निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर बिक्री, अनिवार्य टैगिंग में अनियमितता अथवा अन्य शिकायतें सही पाई जाएंगी, वहां तत्काल दुकान सील करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराकर कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी उर्वरक विक्रेताओं को निर्देशित किया कि उर्वरकों की बिक्री शासन द्वारा निर्धारित मूल्य एवं नियमों के अनुरूप ही करें, ताकि किसानों को समय पर उचित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध हो सके और किसी प्रकार की कालाबाजारी की स्थिति उत्पन्न न हो।
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