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यूपीपीएससी एपीएस भर्ती: 4240 अभ्यार्थियों ने दी परीक्षा, एक भी नहीं हुआ सफल

  • लिखित परीक्षा में सफल 5889 अभ्यर्थियों में से 4240 ने दिया स्किल टेस्ट
  • शॉर्टहैंड की अनिवार्य योग्यता न पूरी होने पर 331 पद रह गए खाली 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की अपर निजी सचिव (एपीएस)-2023 भर्ती परीक्षा का परिणाम सामने आने के बाद प्रदेश भर में चर्चा का विषय बन गया है। भर्ती प्रक्रिया में ऐसा अभूतपूर्व घटनाक्रम सामने आया है, जिसने न केवल अभ्यर्थियों को हैरान किया है बल्कि चयन प्रणाली और कौशल आधारित परीक्षाओं को लेकर भी बहस छेड़ दी है। आयोग की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार 331 पदों पर भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा में दूसरे चरण तक पहुंचे हजारों अभ्यर्थियों में से एक भी उम्मीदवार अंतिम चरण के लिए पात्र नहीं पाया गया। परिणामस्वरूप सभी 331 पदों को अग्रेनीत कर दिया गया है।

एपीएस-2023 भर्ती के लिए कुल 331 रिक्तियां विज्ञापित की गई थीं। लिखित परीक्षा का परिणाम मार्च 2024 में घोषित किया गया था, जिसमें 5889 अभ्यर्थियों को अगले चरण के लिए सफल घोषित किया गया। इसके बाद जून और जुलाई 2024 में दूसरे चरण की परीक्षा आयोजित हुई, जिसमें हिंदी आशुलेखन (शॉर्टहैंड) और टंकण परीक्षा शामिल थी। आयोग के अनुसार इस चरण में 4240 अभ्यर्थी शामिल हुए थे।

यहीं से कहानी ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया। आयोग की विज्ञप्ति के मुताबिक भर्ती नियमों में हिंदी आशुलेखन की न्यूनतम गति 80 शब्द प्रति मिनट निर्धारित है। साथ ही निर्धारित समय में शॉर्टहैंड को टाइप कर प्रस्तुत करना भी अनिवार्य था। मूल्यांकन के बाद आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि कोई भी अभ्यर्थी निर्धारित मानक पूरा नहीं कर सका। इसी कारण किसी को भी तीसरे चरण की परीक्षा के लिए सफल घोषित नहीं किया गया।हालांकि आयोग का निर्णय भर्ती नियमों के अनुरूप बताया जा रहा है, लेकिन यह परिणाम कई सवाल भी खड़े कर रहा है। 

पहला सवाल यह है कि जब लगभग छह हजार अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में सफल हुए और चार हजार से अधिक उम्मीदवार स्किल टेस्ट में शामिल हुए, तब एक भी अभ्यर्थी न्यूनतम मानक तक क्यों नहीं पहुंच पाया? दूसरा सवाल यह है कि क्या शॉर्टहैंड परीक्षा का स्तर अत्यधिक कठिन था या फिर अभ्यर्थियों की तैयारी अपेक्षित स्तर की नहीं थी?

जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में हिंदी आशुलेखन जैसी पारंपरिक कौशल विधाओं की लोकप्रियता और अभ्यास दोनों में कमी आई है। डिजिटल तकनीक के बढ़ते प्रभाव के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी कंप्यूटर आधारित कार्यों में तो दक्ष हैं, लेकिन शॉर्टहैंड जैसी विशेष योग्यता में अपेक्षित दक्षता विकसित नहीं कर पा रहे हैं। दूसरी ओर अभ्यर्थियों के बीच यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

फिलहाल आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि 331 पदों पर चयन नहीं हो सकेगा और इन्हें भविष्य की भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। लेकिन यह मामला केवल एक भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं है। इसने प्रतियोगी परीक्षाओं में कौशल परीक्षण की गुणवत्ता, अभ्यर्थियों की तैयारी और चयन मानकों पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि आयोग इस विषय पर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करता है या नहीं, और अभ्यर्थियों की ओर से इस परिणाम को लेकर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है

‘दूसरे चरण की परीक्षा में कोई भी अभ्यर्थी हिन्दी आशुलेखन में निर्धारित न्यूनतम 80 शब्द प्रति मिनट की त्रुटिरहित गति हासिल नहीं कर पाया। इसी कारण किसी भी उम्मीदवार को तृतीय चरण के लिए सफल घोषित नहीं किया गया और सभी 331 रिक्तियों को अगली भर्ती के लिए कैरी फॉरवर्ड कर दिया गया है।

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