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सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की परिभाषा तय करने के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित की


नई दिल्ली । उच्चतम न्यायालय ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा तय करने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। कोर्ट ने उच्चस्तरीय समिति से 31 अगस्त तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।समिति की अध्यक्षता इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन(आईसीएफआरई) के महानिदेशकर कंचन देवी करेंगी। कंचन देवी के अलावा इस कमेटी में भारतीय वन सर्वेक्षण के पूर्व महानिदेशक डॉ सुभाष आशुतोष, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के पूर्व निदेशक डॉ राजेंद्र कुमार शर्मा, पर्यावरण मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव बृज मोहन सिंह राठौर और दिल्ली यूनिवर्सिटी के वनस्पति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष अशोक भटनागर शामिल होंगे।कोर्ट ने इस समिति की मदद करने के लिए दो विशेषज्ञों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रुप में नियुक्त करने का आदेश दिया। विशेष आमंत्रितों में इंडियन इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन सेटलमेंट्स, बेंगलुरु के प्रोफेसर जगदीश कृष्णास्वामी और हरियाणा सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लक्ष्मीकांत शर्मा को नियुक्त किया है। कोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय को निर्देश दिया कि वो इस कमेटी का सदस्य सचिव के लिए अपने मंत्रालय से निदेशक स्तर के किसी अधिकारी को नामित करें।26 फरवरी को उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि वो विशेषज्ञों की राय लेगी कि क्या अरावली इलाके में खनन की इजाजत दी जा सकती है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से विशेषज्ञों का नाम सुझाने को कहा था। कोर्ट ने कहा था कि वो विशेषज्ञों से पूछेगी कि अगर अरावली इलाके में खनन की इजाजत दी जा सकती है तो किस हद तक। साथ ही इसकी मॉनिटरिंग कौन करेगा। कोर्ट ने मामले में पेश वकीलों से भी कहा था कि वे कमेटी बनाने के लिए विशेषज्ञों का नाम सुझाएं। कोर्ट विशेषज्ञों की राय का पूरी तरह आकलन करेगा, जिसमें अरावली हिल्स और अरावली रेंज की परिभाषा, सौ मीटर की ऊंचाई की सीमा का असर शामिल होगा। कोर्ट इस बात पर भी विचार करेगा कि क्या पहाड़ियों के बीच पांच सौ मीटर के अंतराल में पर्यावरण का नुकसान किए बिना नियंत्रित खनन की इजाजत दी जा सकती है।कोर्ट ने साफ किया था कि अरावली को लेकर पहले दिए गए उस आदेश पर लगी रोक जारी रहेगी, जिसमें 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली मानने की बात कही गई थी।

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