श्रावस्ती जिले के नासिरगंज में मोहर्रम का चांद नजर आते ही गम-ए-हुसैन (अ.स.) की याद में अज़ादारी का सिलसिला शुरू हो गया है। चांद रात को हुसैनिया इमामबाड़े में एक मजलिस का आयोजन किया गया। इस मजलिस के साथ ही सभी इमामबाड़ों में काले परचम (अलम) लगाने और आगामी मजलिसों के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह परंपरा मोहर्रम के दौरान शोक और स्मरण का प्रतीक है। मजलिस के समापन पर उपस्थित लोगों ने नौहाख्वानी और सीनाज़नी कर कर्बला के शहीदों को याद किया। यह क्रिया हुसैन और उनके साथियों के बलिदान के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए की जाती है। मजलिस को ज़ाकिर जनाब अम्मार रिजवी साहब ने खिताब किया, जबकि शाहरुख हैदर ने नौहा पढ़ा। इस अवसर पर शिया समुदाय के वकार हैदर, नाजिम हैदर, शादाब हुसैन, फैजी हुसैन, बन्ने, सिराज हैदर और अली सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।
नासिरगंज में मोहर्रम की अज़ादारी शुरू:चांद दिखने के बाद गम-ए-हुसैन की याद में मजलिसें
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