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 ईरान-अमेरिका समझौते में आगे क्या होगा?

स्विट्जरलैंड: ईरान और अमेरिकी के बीच शांति प्रस्ताव पर सहमति बन गई है और दोनों देशों ने डील पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं। इस डील से इजरायल नाराज है और इसे लेकर गुरुवार को अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ती दरार सबके सामने आ गई, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान समझौते की आलोचना करने वाले इज़राइली लोगों पर तीखा हमला किया और कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही इज़राइल के “एकमात्र ताकतवर सहयोगी” हैं। उन्होंने इज़राइल के कुछ कैबिनेट मंत्रियों पर समझौते को लेकर “अति-प्रतिक्रिया” देने का आरोप भी लगाया।

वहीं, व्हाइट हाउस ने  कहा कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्जरलैंड की अपनी यात्रा टाल रहे हैं। उन्हें वहां ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत के एक नए दौर की अगुवाई करनी थी। इस देरी से युद्ध खत्म करने के मकसद से हुए शुरुआती समझौते के भविष्य पर नए सवाल उठने लगे हैं। अब आगे क्या होगा?

 अमेरिका ईरान डील में आगे क्या होगा?

लेबनान पर हमले बंद करो-इजरायल को फ्रांस ने दी सलाह
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने शुक्रवार को कहा कि इज़राइल को लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई रोकनी चाहिए और अमेरिका को इज़राइल पर दबाव डालना चाहिए। इज़राइल ने गुरुवार को कहा कि वह दक्षिणी लेबनान में सैन्य नियंत्रण वाले इलाके के बाहर भी हमले करने से इनकार नहीं करेगा। यह कदम अमेरिका-ईरान समझौते की शर्तों को चुनौती देने जैसा है, जिसमें लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही गई थी। बैरोट ने फ्रांसीसी ब्रॉडकास्टर ‘फ्रांस-इन्फो’ से बात करते हुए कहा कि फ्रांस अभी भी लेबनान की सेना के लिए समर्थन जुटाने के मकसद से एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की कोशिश कर रहा है।

इजरायल ने लेबनान पर किए ताबड़तोड़ हमले
लेबनान की नेशनल न्यूज़ एजेंसी (NNA) के अनुसार, रात भर दक्षिणी लेबनान के नबातीह ज़िले में इज़राइली हवाई हमलों और तोपखाने की गोलाबारी में कम से कम 16 लोग मारे गए और कई अन्य घायल या लापता हो गए। एजेंसी ने इस बमबारी को हाल के महीनों में इस इलाके पर हुए सबसे भीषण इज़राइली हमलों में से एक बताया है, जिसमें आधी रात के ठीक बाद कई रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया गया।

अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली बातचीत अब नहीं होगी-स्विस विदेश मंत्रालय
स्विस विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक माउंटेनटॉप रिज़ॉर्ट में शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत अब नहीं होगी। यह घोषणा व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता के उस बयान के बाद आई है जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में ईरानी वार्ताकारों से मिलने की अपनी योजना रद्द कर दी है। इस बैठक का मकसद तेहरान और वाशिंगटन के बीच युद्ध खत्म करने के लिए हुए समझौते को लागू करने पर बातचीत शुरू करना था।

ईरान ने अमेरिका को दी चेतावनी-अगर बात से मुकरे तो…
ईरान के सरकारी मीडिया की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा है कि अगर अमेरिका शांति समझौते का उल्लंघन करता है, तो उनके पास “जवाबी कार्रवाई” की योजना है। IRIB न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, काउंसिल ने कहा कि वह “तब तक चैन से नहीं बैठेगी जब तक ईरानी राष्ट्र के पूरे अधिकार बहाल नहीं हो जाते।” बयान में आगे चेतावनी दी गई कि “अगर अमेरिका की तरफ से समझौते से कोई भी विचलन या उल्लंघन होता है, तो पहले से तय योजना के अनुसार जवाबी कार्रवाई की जाएगी।”

हमें सिर्फ़ बातों पर भरोसा नहीं है-जेडी वेंस बोले
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ ‘जेंटलमैन एग्रीमेंट’ (आपसी समझ वाले समझौते) का बचाव किया। यह समझौता ईरान के यूरेनियम स्टॉक और परमाणु महत्वाकांक्षाओं को संभालने के तरीके के बारे में था। व्हाइट हाउस की ब्रीफिंग में वेंस ने कहा, “इनमें से कुछ समझौते लिखित रूप में हैं, लेकिन असल बात यह है कि चाहे वे लिखित हों या मौखिक, हमने यह डील इसी तरह से तैयार की थी क्योंकि हमें सिर्फ़ बातों पर भरोसा नहीं है। हम काम और व्यवहार पर भरोसा करते हैं।”
ईरान को कतर से 6 अरब डॉलर मिल सकते हैं
 अमेरिका के साथ हुए अंतरिम समझौते के तहत ईरान को कतर में रखी तेल से हुई 6 अरब डॉलर की कमाई मिल सकती है। अखबार ने बताया कि यह पैसा 60 दिनों की बातचीत की अवधि के दौरान किस्तों में उपलब्ध कराया जाएगा और इसका इस्तेमाल केवल मानवीय सहायता का सामान और अमेरिका से ऐसी अन्य चीजें खरीदने के लिए किया जा सकेगा जिन पर प्रतिबंध लागू नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस व्यवस्था का मकसद तेहरान को सीमित आर्थिक राहत देना है, साथ ही इस बात पर कड़ा नियंत्रण रखना है कि इन फंड का इस्तेमाल कैसे किया जाता है।

युद्ध खत्म करने का समझौता अमेरिका के लिए जीत : ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने का समझौता अमेरिका के लिए एक “जीत” थी। उन्होंने अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के कुछ लोगों समेत हो रही आलोचनाओं को खारिज कर दिया। ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ नेटवर्क पर एक पोस्ट में कहा, “अमेरिका की ओर से ईरान को 300 अरब डॉलर का कोई भुगतान नहीं किया जा रहा है। यह फ़ेक न्यूज़ है! अमेरिका के लिए तो बस सफलता, तेल की कम कीमतें और जीत ही है। स्टॉक मार्केट देखिए। यह डेमोक्रेट्स का प्रोपेगैंडा है!!!”
अमेरिका और ईरान के बीच अब कैसे होगी बात?
व्हाइट हाउस ने बताया कि वेंस की अगुवाई वाली टीम रवाना होने के लिए तैयार थी, लेकिन बातचीत से जुड़ी लॉजिस्टिकल चुनौतियों की वजह से यात्रा टालने का फैसला किया गया। राजनीतिक रूप से ईरान समर्थित लेबनानी मिलिटेंट ग्रुप हिज़्बुल्लाह से जुड़ा है।  लेबनान में इज़राइल के लगातार जारी मिलिट्री ऑपरेशन की वजह से ईरान स्विट्जरलैंड अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने में देरी कर रहा है।

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