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डॉक्टर्स डे विशेष: चिकित्सा सेवा, शिक्षा और समाजसेवा से जुड़ा है बदायूं का अंसारी परिवार

 

बदायूं। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (डॉक्टर्स डे) के अवसर पर चिकित्सा सेवा के साथ-साथ समाज और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले चिकित्सकों को याद किया जा रहा है। इसी क्रम में बदायूं का अंसारी परिवार भी लंबे समय से चिकित्सा सेवा, चिकित्सा शिक्षा और सामाजिक कार्यों में अपनी सक्रिय भागीदारी के लिए जाना जाता है।

परिवार के वरिष्ठ सदस्य डॉ. शकील अहमद (BUMS, MD) चिकित्सा क्षेत्र के साथ सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय हैं। वे विभिन्न सामाजिक, शैक्षिक एवं चिकित्सा संस्थाओं से जुड़े हैं और समय-समय पर स्वास्थ्य जागरूकता, जनकल्याण तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रमों में सहभागिता करते रहे हैं। उनकी पत्नी डॉ. राबिया शकील (BUMS, MSW) चिकित्साधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं।

अंसारी परिवार के कई सदस्य एलोपैथी एवं यूनानी चिकित्सा पद्धति से जुड़े हैं। इनमें डॉ. इत्तेहाद आलम (MBBS, DCH), डॉ. संजीदा आलम, डॉ. हस्सान आलम (MBBS, MD), डॉ. हीरा आलम (MBBS, MD), डॉ. अतिया हस्सान (MBBS, MD), डॉ. अमन आज़ाद (MBBS, MD), डॉ. क़ादिर (BUMS), डॉ. खदीजा बेग़म (B.Sc., BUMS), डॉ. नाहिदा आज़ाद (BUMS), डॉ. नाज़रा आज़ाद (BUMS), डॉ. इम्तियाज़ अहमद, डॉ. इलमा इम्तियाज़ (MBBS) तथा डॉ. सुब्हान अंसारी (MBBS, अध्ययनरत) शामिल हैं। परिवार से जुड़े चिकित्सकों में डॉ. इत्तेहाद आलम बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में भी अपनी पहचान रखते हैं और लंबे समय से बच्चों के उपचार एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हुए हैं।

जानकारी के अनुसार, परिवार से जुड़े चिकित्सक विभिन्न चिकित्सा संस्थानों, पैरामेडिकल कॉलेजों, चैरिटेबल डिस्पेंसरी तथा डायग्नोस्टिक सेंटरों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इसके साथ ही चिकित्सा शिक्षा और सामाजिक कार्यों में भी उनकी भागीदारी बनी हुई है। आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद मरीजों को रियायती अथवा निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने के प्रयास भी समय-समय पर किए जाते रहे हैं। डॉक्टर्स डे के अवसर पर अंसारी परिवार ने सभी चिकित्सकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और मानव सेवा का माध्यम है। उन्होंने मरीजों की सेवा और स्वास्थ्य के प्रति समर्पण के संकल्प को आगे भी जारी रखने को कहा है। मानव सेवा ही सच्ची चिकित्सा है और रोगी की मुस्कान ही चिकित्सक का सबसे बड़ा सम्मान है।

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