नितिन नवीन ने दिया था आश्वासन की 1024 एकड़ में बने पुराने मकानों को किया जाएगा फ्री होल्ड, प्रारूप भी हुआ था तैयार
रवीश कुमार मणि
पटना, 06 जूलाई ( तरूणमित्र ) । राजधानी का सबसे पुराना विवादित मामला बिहार राज्य के अधिग्रहण 1024 एकड़ का मामला एक नया रूप लेने जा रहा है । सम्राट सरकार को अपने सरकारी विभागों के लिए 80 एकड़ जमीन की ज़रूरत है । हवाई सर्वेक्षण कर 65 एकड़ जमीन को चिन्हित कर लिया गया है । इसमें जल्द ही सरकार संबंधित विभागों को नये भवन के लिए आवंटित करने के काम में जूट गयी है वहीं चिन्हित जमीन को पीपी मोड पर बिल्डरों को देने के लिए विज्ञापन निकालने का काम करेगी । भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह सांसद, जब बिहार में नगर विकास व आवास मंत्री थे तो इन्होंने राजीवनगर वासियों को आश्वासन दिया था की जो पुराने मकान बने है उन्हें एक दर पर फ्री होल्ड किया जाएंगा । उनके समय काल में प्रारूप भी तैयार हो गया था और मकानों की सूची भी बना ली गयी थी । हाल में राजीवनगर के लोग मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी व नगर विकास आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा से मिले थे तो उन्होंने भी संतोषजनक प्रतिक्रिया दिया था । हवाई सर्वेक्षण के बाद लोगों का दिल फिर एक बार धक – धक करने लगा है की कहीं वर्ष 2022 जैसा हाल न हो जाएं ।
हवाई सर्वेक्षण व फिजिकल सर्वे कर बनाया गया रिपोर्ट
आवास बोर्ड के अधिग्रहित 1024 एकड़ में 10 प्रतिशत जमीन भी अब खाली नहीं है । विशेष शाखा के डीजी कुंदन कृष्णन ने इस बाबत सचिव नगर विकास आवास विभाग, ज़िलाधिकारी पटना , एसएसपी पटना को पत्र लिखा था । इसमें उल्लेख किया गया था की जो खाली जमीन बचा है उसे हर हाल में सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई किया जाएं । सचिव नगर विकास व आवास विभाग के निर्देश पर प्रबंध निदेशक आवास बोर्ड ने रोस्टर ड्यूटी लगाने के लिए सचिव को कहां था । सचिव आवास बोर्ड ने दीघा कैंप कार्यालय में 6 सहायक अभियंता को लगाया है ।
सरकारी विभागों के नये भवनों के लिए 80 एकड़ जमीन की आवश्यकता है । इसको लेकर एक सप्ताह पहले बिहार राज्य आवास बोर्ड की अधिग्रहीत 1024 एकड़ का हवाई सर्वेक्षण कराया गया । ब्लू प्रिंट मिलने के बाद बिहार राज्य आवास बोर्ड के मुख्य अभियंता के नेतृत्व में दो टीमें गठित की गयी । हवाई सर्वेक्षण के उपरांत बनाए गये ब्लू प्रिंट के आधार पर फिजिकल सर्वे किया गया । इसमें कई साइट मिलाकर 65 एकड़ खाली व बाउंड्री वाली जमीन को चिन्हित किया गया है । चिन्हित जमीन को जल्द ही सरकारी विभागों को आवंटित कर दिया जाएगा और जो रिक्त जमीन बचेंगे उन्हें पीपी मोड में बिल्डरों को देने पर विचार किया जा रहा है जल्द ही विज्ञापन की प्रक्रिया शुरू किया जाएगा ।
नये मकान बनाने वाले का कोई भविष्य नहीं
जजेज कोलनी एवं अन्य सरकारी संस्थानों को जमीन देने के नाम पर बीते वर्ष 2022 में सैकड़ों जेसीबी और हजारों पुलिसबल के साथ जिला पुलिस- प्रशासन ने 65 मकान व बाउंड्री को जमीनदोज कर दिया । महावीर कालोनी की ओर जेसीबी का जत्था चला तों राजीवनगर वासियों ने पटना हाईकोर्ट में गुहार लगाया तब जाकर मकान तोड़ने की कार्रवाई रोकी गयी । दो वर्षों बाद उच्च न्यायालय पटना की एकल पीठ ने राजीवनगर वासियों के पक्ष में निर्णय दिया और सरकार को आदेश दिया की जो भी मकान टूटे हैं उन्हें वास्तविक क़ीमत ( 05-10 लाख ) तक मुआवजा दें अगर अधिक मुआवजा लेना है तो निचली अदालत में याचिका दाखिल करें । एकल पीठ के आदेश के विरूद्ध सरकार डबल बेंच में याचिका दाखिल किया । डबल बेंच ने यथास्थिति ( स्टेटस- को ) लगा दिया । पुराने मकान नहीं टूटेंगे लेकिन नये मकान भी नहीं बनेंगे । आवास बोर्ड के अधिकारियों की मानें तो वर्ष 2022 के बाद लगातार ड्रोन सर्वे, फिजिकल सर्वे व हवाई सर्वे किया गया है । जो भी अवैध क़ब्ज़ा कर नये मकान बनाएं जा रहें हैं उनका कोई भविष्य नहीं है । आवास बोर्ड के पास पुरी आंकड़ा है की जिला – प्रशासन द्वारा जब मकान टूटा था तो कितने मकान बने हुए थे और कितनी जमीन खाली थी ।
चार वर्षों में भू- माफियाओं के खिलाफ 500 से ऊपर एफ़आइआर
दीघा अधिगृहीत 1024 एकड़ में अवैध क़ब्ज़ा कर मकान बनाने वालों के खिलाफ बिहार राज्य आवास बोर्ड लगातार एफ़आइआर कर रहीं है । वर्ष 2022 के पहले तक़रीबन 300-350 एफआरआर हुए थे । जिला – प्रशासन द्वारा वर्ष 2022 में मकान तोड़े जाने के बाद वर्ष 2026 ( वर्तमान ) में दीघा – राजीवनगर थाने में 500 से ऊपर एफ़आइआर हुए है । वहीं सूत्रों की मानें तो करीब 2000 से अधिक चोरी- छीपे मकान कुल अधिग्रहण जमीन पर बनें है । बिहार राज्य आवास बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी का मानना है की उच्च न्यायालय के आदेश से बिजली का कनेक्शन दिया जा रहा है वह सभी के सभी नये मकान बनें है । कब और किस तिथि में मकान बनाएं गये है सब स्पष्ट है । झूठ और गलत की कोई गुंजाइश नहीं है ।
नितिन नवीन चाहते थे स्थाई समाधान फ्री होल्ड करने का प्रारूप हुआ था तैयार
सन् 1972 से वर्तमान वर्ष 2026 तक करीब 54 साल इस विवाद का हो गया और धीरे-धीरे मकान बनते गये । 1024 एकड़ में मात्र 65-85 एकड़ ( पूर्वी – पश्चिमी ) मिलाकर मुश्किल से रह गये है । अधिग्रहण 1024 एकड़ में करीब 10-12 हज़ार मकान बन गये है । सरकारी जमीन बेचकर सबसे अधिक मालामाल सहकारी गृह निर्माण समितियां हुई है । राजीवनगर वासियों के लिए आज भी चिंता सताती रहती है । तत्कालीन नगर विकास मंत्री , वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह सांसद नितिन नवीन इसका स्थाई समाधान चाहते थे । नितिन नवीन फ्री होल्ड करने के लिए एक प्रारूप तैयार करने का आदेश अपने समय काल में दिए थे । दीघा बंदोबस्ती अधिनियम के अनुसार समय पर अगर फ्री होल्ड हो जाता तो सरकार के ख़ज़ाने में अरबों रूपए होते और अवैध क़ब्ज़ा व अवैध निर्माण पर भी रोक लग जाता । राजीवनगर वासियों का प्रतिनिधि मंडल लगातार सरकार के संपर्क में है और स्थाई समाधान चाहते है ।












