लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले बड़ा फैसला लेते हुए शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद का नाम बदलकर ‘परशुरामपुरी’ करने को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही जलालाबाद नगर पालिका परिषद का नाम भी बदलकर परशुरामपुरी नगर पालिका परिषद होगा।
यह फैसला सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में लिया गया।
सरकार ने क्या वजह बताई?
कैबिनेट के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि जलालाबाद का नाम बदलने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह स्थान भगवान परशुराम, जो भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं, की जन्मस्थली है। इसी आधार पर शहर का नाम बदलने का निर्णय लिया गया।
कब शुरू हुई थी प्रक्रिया?
सरकार के मुताबिक,
- 24 अप्रैल 2025 को जलालाबाद का नाम बदलने का प्रस्ताव मिला।
- 27 जून 2025 को केंद्र सरकार से अनुमति मांगी गई।
- 19 अगस्त 2025 को केंद्र से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त हुआ।
- इसके बाद 6 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने नाम परिवर्तन को अंतिम मंजूरी दे दी।
चुनाव से पहले अहम फैसला
यह फैसला ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने बाकी हैं। हाल के वर्षों में योगी सरकार ने कई शहरों और स्थानों के नाम बदले हैं। सरकार का कहना है कि ऐसे फैसलों का उद्देश्य ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को सम्मान देना है।
अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद जलालाबाद की जगह सभी सरकारी रिकॉर्ड और आधिकारिक दस्तावेजों में परशुरामपुरी नाम का इस्तेमाल किया जाएगा।












