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आयकर विभाग ने आईटीआर-5 फॉर्म के लिए जारी की एक्सेल यूटिलिटी, जान लें ये जरूरी नियम….

  • आयकर विभाग ने AY 2026-27 के लिए ITR-5 Excel Utility जारी की।
  • एक्सेल यूटिलिटी ई-फाइलिंग पोर्टल पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध।
  • ऑफलाइन मोड में रिटर्न तैयार करने की सुविधा।

नई दिल्ली। आयकर विभाग ने आकलन वर्ष 2026-27 के लिए आईटीआर-5 फॉर्म की एक्सेल यूटिलिटी जारी कर दी है। इसे आधिकारिक इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लाइव कर दिया गया है, जहां से करदाता इसे ऑफलाइन मोड में रिटर्न तैयार करने के लिए डाउनलोड कर सकते हैं।

आयकर विभाग ने बुधवार को ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में कहा कि आकलन वर्ष 2026–27 के लिए आईटीआर-5 की एक्सेल यूटिलिटी जारी की गई है।

अब इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल https://incometax.gov.in/iec/foportal/ पर उपलब्ध है। दरअसल, किसी भी आईटीआर फॉर्म के लिए एक्सेल यूटिलिटी को बेहद अहम माना जाता है। इसके बिना इनकम टैक्स को जमा नहीं किया जा सकता।

आयकर विभाग ने आईटीआर फॉर्मों की ई-फाइलिंग सुविधा चरणबद्ध तरीके से शुरू की है, जिसमें सबसे पहले 15 मई को आईटीआर-1 और आईटीआर-4 की एक्सेल यूटिलिटी जारी की गई। इसके बाद 27 मई को आईटीआर-2 के लिए ऑनलाइन फाइलिंग की सुविधा शुरू की गई।

फिर 19 जून को आईटीआर-3 के लिए न केवल ऑनलाइन फाइलिंग शुरू की गई बल्कि उसकी एक्सेल यूटिलिटी भी जारी कर दी गई। अब विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आईटीआर-5 की एक्सेल यूटिलिटी भी उपलब्ध करा दी है।

आयकर रिटर्न का आईटीआर-5 फॉर्म
आईटीआर-5 आयकर रिटर्न का वह फॉर्म है, जिसे व्यक्तिगत करदाता या एचयूएफ नहीं बल्कि विभिन्न प्रकार की संस्थाओं और संगठनों द्वारा भरा जाता है।

इसमें पार्टनरशिप फर्म, लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी), एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स (एओपी), बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स (बीओआई), आर्टिफिशियल ज्यूरिडिकल पर्सन (एजेपी), स्थानीय निकाय, सहकारी समितियां.

सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 या किसी राज्य के संबंधित कानून के तहत पंजीकृत सोसाइटियां, ऐसे ट्रस्ट जिन्हें आईटीआर-7 दाखिल करने की जरूरत नहीं होती।

इसके अलावा मृतक या दिवालिया व्यक्ति की संपत्ति का प्रबंधन करने वाली इकाइयां, आयकर अधिनियम की धारा 160(1)(iii) और 160(1)(iv) के तहत आने वाले प्रतिनिधि असेसी, धारा 139(4ई) के तहत आने वाले बिजनेस ट्रस्ट और धारा 139(4एफ) के तहत आने वाले इन्वेस्टमेंट फंड शामिल हैं।

इस फॉर्म को कोई भी व्यक्ति, हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) और कंपनी आयकर जमा करने के लिए नहीं भर सकती है।

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