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भोजशाला मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की पूरी कहानी, पढ़ें क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि भोजशाला विवाद अत्यंत संवेदनशील मामला है और हिंदू तथा मुस्लिम दोनों पक्षों को धर्य रखना चाहिए। देश की शीर्ष कोर्ट ने यह भी कहा कि वह इस मामले की रोजाना सुनवाई करने और इसका समाधान निकालने के लिए तैयार है।

सुप्रीम कोर्ट मंलवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था जिसमें कहा गया था कि धार जिले में मौजूद विवादित भोजशाला परिसर देवी सरस्वती का मंदिर है।

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‘हर शब्द का सावधानी के साथ प्रयोग करना होगा’

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि उसे हर शब्द का अत्यंत सावधानी के साथ प्रयोग करना होगा। सीजेआई ने मौखिक रूप से कहा, ‘ये बेहद संवेदनशील मामले हैं। कोर्ट में कही गई कोई भी बात अनावश्यक विवाद पैदा कर सकती है या गलत संदेश दे सकती है। इसलिए हमें अपने हर शब्द के प्रयोग में अत्यधिक सावधानी बरतनी होगी।’

सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए

उन्होंने कहा, ‘अंतरिम व्यवस्था से जुड़ा यह मामला पहली बार हमारे समक्ष आया है। हाई कोर्ट के आदेश और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में राज्य सरकार की परेशानियों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। हमारा मानना है कि इस मामले को 10 से 15 दिनों के भीतर उपयुक्त पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।’

हुज़ैफा अहमदी और निज़ाम पाशा पेश हुए

इससे पहले मुस्लिम पक्षकारों की ओर से सोमवार को पेश हुए वरिष्ठ वकील हुज़ैफा अहमदी और वकील निज़ाम पाशा ने पीठ से इस मामले की तत्काल सुनवाई का आग्रह किया था। इस पर चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों से कहा था कि वे याचिकाओं में मौजूद त्रुटियों को दूर करें। उन्होंने आश्वासन दिया था कि इसके बाद मामले को जल्द सुनवाई के लिए किसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।

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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 15 मई के अपने फैसले में कहा था कि धार जिले का विवादित भोजशाला–कमाल मौला मस्जिद परिसर देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर है। साथ ही अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के उस कई दशक पुराने आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को इस परिसर में शुक्रवार की नमाज़ अदा करने की अनुमति दी गई थी।

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