18वीं सदी में जब महाराजा जय सिंह द्वितीय ने यहां खगोलीय वेधशाला का निर्माण कराया होगा तो उन्हें जरा भी अंदाज नहीं होगा कि वह देश को एक ऐसी जगह देने जा रहे हैं, जिसे भारतीय ‘प्रतिरोध’ के सबसे बड़े स्थल के तौर पर जानेंगे। हर दौर में, हर दशक में जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिनके बारे में पूरी दुनिया में लिखा-पढ़ा गया। यही जगह, एक नई GenZ क्रांति की गवाह बन रही है, जहां कुछ लोग अपने हक की आवाज बुलंद कर रहे हैं। आवाज यह कि उनकी मेहनत को भ्रष्टाचार का कैंसर बार-बार, हर बार चाल कर मार न दे।
जंतर मंतर पर आए प्रदर्शनकारी 2011 की तरह ‘प्रबुद्ध वर्ग’ नहीं है, जो दशकों के सरकारी दमन से ऊबे हुए लोग थे, जिन्हें एक आशा की किरण दिखी कि अब अचानक देश में सब ठीक हो जाएगा। न ही इनमें उस तरह की वैचारिक परिपक्वता है, जैसी अन्ना आंदोलन के वक्त थी। इस दौर के GenZ क्रांतिकारी ‘हंसी-हंसी’ में सरकार की मुश्किलें बढ़ा चुके हैं। 6 जून को कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भारत आए और सीधे जंतर मंतर धरना देने पहुंच गए।
शुरुआत में जब भीड़ जुटी तो लोगों को भरोसा नहीं था कि यह बड़ा आंदोलन होगा। अलग-अलग राजनीतिक दलों ने इशारा किया कि यह आंदोलन, आम आदमी पार्टी के लोगों का है, कांग्रेस से लेकर समाजवादी पार्टी तक ने किनारा किया। आंदोलन में जैसे ही सोनम वांगचुक की एंट्री हुई, सब बदल गया। सोनम वांगचुक ने 28 जून से आमरण अनशन का एलान किया और अन्न त्याग दिया। तब तक भी इन्फ्लुएंसर जुटे थे लेकिन ऐसे नहीं, जिस तरह से अब जुड़ गए हैं।
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हर हाथ में कैमरा, हर प्रदर्शनकारी ‘पत्रकार’ या इन्फ्लुएंसर
जंतर मंतर पर ‘नागरिक पत्रकारिता’ अपने शीर्ष पर है। साल 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए युवाओं का जत्था जंतर मंतर पर उमड़ आया है। अतरंगी कपड़े, जुबान पर गालियां, सरकार और सिस्टम से नाराजगी और मांग एक कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। जंतर मंतर पर जो पोस्टर लगे हैं, उन्हें देखकर सरकार समर्थक गुटों को झटका लग सकता है। प्रदर्शनकारियों के हाथों में जो तख्तियां हैं, पहले के प्रदर्शनों में कभी नहीं दिखीं। इस प्रदर्शन में इन्फ्लुएंसर की प्रदर्शनकारी हैं, प्रदर्शनकारी ही पत्रकार हैं। 24 घंटे आंखों देखी की लाइव स्ट्रीमिंग की जा रही है।
‘पीएम मोदी की पहली बार पड़ी हैं ऐसी गालियां’
GenZ उन पोस्टरों को भी दिखा रहे हैं, जिनमें गालियां लिखी हैं। गालियां, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखी गई हैं। कोई उनकी वैवाहिक स्थिति का हवाला देकर बोल रहा है कि ‘कोई शादुशुदा प्रधानमंत्री बनाओ, जो मन की बात बीवी से करे और काम की बात जनता से’, किसी के हाथ में तख्ती है कि ‘मेरा बर्थडे है, इस्तीफा दे दो बाबू।’ ऐसे कई पोस्टर छाए हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिन लोगों के हाथों में पोस्टर है, वे खुद को पॉपुलर कराने का दांव भी बाखूबी समझते हैं।
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’30 फीसदी से ज्यादा आंदोलनकारी इन्फ्लुएंसर या पत्रकार’
GenZ प्रदर्शनस्थल पर अगर 70 फीसदी आंदोलनकारी हैं तो कम से कम 30 फीसीदी इन्फ्लुएंसर और पत्रकार पहुंचे हैं। प्रदर्शनकारियों के हाथों में महंगे कैमरे हैं, गिंबल हैं, कैमरा स्टैंड हैं और सधी स्क्रिप्ट है। किसी के हाथ में ब्लूटुथ माइक है, किसी ने माइक आईडी बनवाई है। यह संख्या बहुतायत में है। कॉकरोच जनता पार्टी का जहां मुख्य स्टेज है, वहां कम भीड़ है, उससे ज्यादा खाली मैदान में है। खचाखच भीड़ में लोग गालियां दे रहे हैं, पीएम मोदी के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं।

इन्फ्लुएंसर जिनके नाम की खूब चर्चा है
20 जुलाई से ही एक ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट नीरजा भी सुर्खियों में रहीं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को LGBTQ गेटअप में दिखाया था, उनके नाखूनों के पोस्टर लेकर खड़ी थीं। वह ट्रांसजेंडर महिला हैं और मॉडलिंग करती हैं। उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब छाईं रहीं। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर में नीरजा अकेली नहीं हैं। कई ऐसे चेहरे हैं, जो अभी लोकप्रिय हो रहे हैं जिनके लाखों में फॉलोअर हैं लेकिन कोई पहचानता नहीं है।
विवादित बयानों के लिए मशहूर पूनम पांडेय भी पहुंची। वडा पाव गर्ल नाम से मशहूर ‘चंद्रिका दीक्षित’ भी अभिजीत दीपके से मिलने पहुंची, आंदोलन को लेकर उन्होंने साथ देने का वादा किया। केके क्रिएट के नाम से मशहूर काव्या भी जंतर मंतर दिखीं। बिगबॉस विनर एल्विश यादव भी धरना स्थल पर पहुंच चुके हैं। रजत दलाल और पुनीत सुपरस्टार जैसे रील स्टार भी जंतर मंतर पहुचं रहे हैं, अपनी तस्वीरें खिंचा रहे हैं, रील बना रहे हैं। आर्यन कैल्विन भी नजर आए हैं।
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प्रदर्शनकारी, जो अपनी फिल्म के हीरो भी हैं
एक बड़ी फौज GenZ इन्फ्लुंसर्स की है जो अभी-अभी कंटेंट क्रिएटर बने हैं। GenZ इन्फ्लुएंसर की खासियत है कि आपको लगा कि वे प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन कहीं दूर खड़े उनके साथी उन्हें रिकॉर्ड कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर इनकी भरमार है। कुछ इन्फ्लुएंसर शॉट देने के बाद अपने कैमरे में फुटेज दखते हुए दिखे। देश के लिए यह आपदा, उनके लिए अवसर बनकर आई है। कटेंट क्रिएशन का बेहतरीन मौका मिला है, जिसे भुनाने की ललक हर किसी में साफ झलक रही है।
GenZ का कंटेंट दोहराव वाला नहीं है। कभी वे रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को छेड़ रहे हैं, कभी पुलिसकर्मियों को। कई प्रदर्शनकारी पुलिस को भी खाना खिला रहे हैं, पानी पिला रहे हैं, कई प्रदर्शनकारी उनसे सवाल कर रहे हैं, ‘आपने उस दिन लाठी क्यों मारी।’ पुलिसकर्मी असहज हैं। कुछ बोल नहीं पा रहे हैं। पुलिस की हिंसक कार्रवाई पर विपक्ष और सोशल मीडिया ने खूब किरकिरी की है। कभी GenZ ‘पुलिस अंकल, पुलिस अंकल’ कहकर छेड़ रहे हैं, कभी उन्हें ‘वास्तेगुना हुइंया’ बोलकर निकल आ रहे हैं।

पत्रकारों को भी मिल गया फेमस होने का मौका
कई यूट्यूबर, अब न्यूज बिजनेस में उतर चुके हैं। माइक में कंपनी का लोगो है, गले में प्रेस कार्ड है और सामने कंटेंट ही कंटेंट है। कोई सड़क साफ करती लड़की को रिकॉर्ड कर रहा है, कोई छोटे बच्चों का इंटरव्यू कर रहा है। किसी के दावे सनसनीखेज हैं, जिन्हें पुलिस और जनता दोनों यकीन नहीं कर पा रही है। हर 2-4 घंटे में एक बवाल का मौका भी मिल जा रहा है। स्विगी, जोमौटे जैसे फूड डिलीवरी ऐप के वर्करों के भी खूब इंटरव्यू हो रहे हैं।
कई पत्रकार 20 जुलाई को हुए लाठीचार्ज के बारे में आज तक बता रहे हैं कि उस दिन का मंजर कैसा था। कई नए यूट्यूब न्यूज चैनल के पत्रकार भी दिख रहे हैं, जो इसी आंदोलन से शुरू हुए हैं। कुछ चर्चित पत्रकार और यूट्यूबर भी छाए हुए हैं। उनके आसपास भीड़ है। लोग तस्वीरें खिंचा रहे हैं, इंस्टा-एक्स पर अपलोड कर रहे हैं। लंबे वीडियोज की जगह लोग छोटे-छोटे क्लिप शेयर कर रहे हैं, जिन्हें खूब वायरल किया जा रहा है। कई स्वतंत्र पत्रकार भी मानते हैं कि यह विरोध प्रदर्शन इंडस्ट्रियल बूम की तरह है।
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कैसे इतना बड़ा हो गया GenZ प्रदर्शन?
कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में प्रदर्शनकारी धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे। 18 जुलाई की सुबह सोनम वांगचुक को सुबह-सुबह दिल्ली पुलिस के लोग हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देकर सफदरजंग अस्पताल में टांग ले गए। उन्हें सफेद चादर से दोनों तरफ से घेरा गया और वैन में बिठा दिया गया। ही नई क्रांति का टर्निंग पॉइंट साबित हुई।
कॉकरोच जनता पार्टी ने सोनम वांगचुक को छोड़ने, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के नाम पर ‘चलो संसद’ मार्च निकालने का एलान किया। पुलिस ने इजाजत नहीं दी। दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत इलाके में कर्फ्यू लगा दिया। आंदोलनकारी जंतर मंतर से निकलकर आगे बढ़े। राजीव चौक होते हुए रेल भवन तक जैसे ही वे पहुंचे, पुलिस ने बैरिकेड लगा दी। बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश हुई।

क्यों सरकार और दिल्ली पुलिस पर भड़के हैं लोग?
पुलिस प्रदर्शनकारियों के रुख को देखकर असहज हो गई। संसद के मानसून सत्र का पहला दिन था तो लोग सदन के भीतर भी हंगामा मचा। प्रधानमंत्री भारी विरोध और नारेबाजी के बाद सदन जाकर वापस प्रधानमंत्री आवास लौटे। संसद में सुरक्षाकर्मी गेट की तरफ भागे, 5 हजार से ज्यादा जवानों को प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए भेजा गया।
अब घाव का बदला ले रहे प्रदर्शनकारी?
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ते देखकर लाठी चार्ज किया, आंसू गैस के गोले दागे, कई लोगों को गंभीर चोटें आईं। एक 12 साल की बच्ची का सिर फटा, कई लोग गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराए गए। पुलिस के साथ-साथ सिविल कपड़ों में कुछ लोगों ने लाठियां चलाई। यह पुलिस के इशारे पर हुआ। इसी के बाद आंदोलनकारी बढ़ गए। 20 जुलाई के बाद से देश के कई पत्रकार, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, यूट्यूबर जंतर मंतर पर टिक गए है। कई पुलिसकर्मी और पत्रकार भी पिटे हैं। अब तक 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी अलग-अलग घटनाओं में घायल हैं।
सरकार पर बढ़ता जा रहा है दबाव
सरकार पर लगातार दबाव बढ़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आधी रात इंस्टाग्राम पर आना पड़ा, उन्हें यह बताना पड़ा कि पेपर लीक के खिलाफ सरकार क्या कानून लाने वाली है। सोनम वागंचुक अनशन तोड़ चुके हैं लेकिन अब प्रदर्शनकारी रुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने साफ एलान किया कि अगर इस्तीफा नहीं तो धरना प्रदर्शन खत्म भी नहीं होगा।












