बिजनौर। किसानों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद कृषि विभाग ने यूरिया की कथित कालाबाजारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अफजलगढ़ क्षेत्र में खाद विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर एक प्रतिष्ठान की उर्वरक बिक्री तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दी गई है।
उपकृषि निदेशक डॉ. घनश्याम वर्मा के नेतृत्व में तहसीलदार धामपुर धनराज सिंह एवं विभागीय टीम ने अफजलगढ़ क्षेत्र में विभिन्न खाद विक्रेताओं के यहां औचक निरीक्षण किया। टीम ने सहकारी समिति शेरकोट, स्वास्तिक खाद भंडार अफजलगढ़, बरदी कृपा खाद भंडार तथा लक्ष्मी पेस्टीसाइड्स सहित कई प्रतिष्ठानों की जांच की।
निरीक्षण के दौरान स्वास्तिक खाद भंडार, अफजलगढ़ में सबसे बड़ी अनियमितता सामने आई। उपकृषि निदेशक ने बताया कि पीओएस मशीन के रिकॉर्ड के अनुसार प्रतिष्ठान पर 2171 बैग यूरिया उपलब्ध होना चाहिए था, जबकि मौके पर केवल 55 बैग ही पाए गए। इसके अलावा एनपीके, एसएसपी, अमोनियम एवं एमओपी उर्वरकों के स्टॉक में भी भारी अंतर मिला।
डॉ. घनश्याम वर्मा ने कहा कि रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में इतना बड़ा अंतर यूरिया की कालाबाजारी की आशंका को मजबूत करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
छापेमारी के दौरान संबंधित प्रतिष्ठान के संचालक अधिकारियों को स्टॉक रजिस्टर एवं बिक्री रजिस्टर भी प्रस्तुत नहीं कर सके। इसे उर्वरक नियंत्रण आदेश के गंभीर उल्लंघन के रूप में देखा गया है। विभाग ने तत्काल प्रभाव से संस्थान पर उर्वरकों की बिक्री प्रतिबंधित करते हुए अग्रिम विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
वहीं लक्ष्मी पेस्टीसाइड्स, अफजलगढ़ के निरीक्षण में भी कई अनियमितताएं मिलीं। जांच में पाया गया कि किसानों को उर्वरक बिक्री के समय बिल नहीं दिए जा रहे थे। मांगने पर संचालक स्टॉक एवं बिक्री रजिस्टर भी उपलब्ध नहीं करा सके। इस मामले में भी उर्वरक नियंत्रण आदेश एवं कृषि रक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
उपकृषि निदेशक ने कहा कि जिले में उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर विभाग की लगातार नजर है। किसानों को निर्धारित मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि खाद खरीदते समय अनिवार्य रूप से बिल प्राप्त करें और किसी भी प्रकार की अनियमितता की सूचना तत्काल कृषि विभाग को दें। कृषि विभाग की इस कार्रवाई से खाद कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है, जबकि किसानों ने विभाग की सख्ती का स्वागत किया है। अधिकारियों का कहना है कि जनपद में उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।












