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अमेरिका-ईरान शांति समझौते की ओर बढ़े कदम, होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने की उम्मीद, भारत को मिल सकती है राहत

वॉशिंगटन/तेहरान/दोहा। अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच 28 फरवरी से जारी संघर्ष के 107 दिन पूरे होने के बीच शांति समझौते को लेकर बड़ी प्रगति की खबर सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौते का मसौदा तैयार कर लिया गया है, जिस पर जल्द हस्ताक्षर हो सकते हैं। हालांकि समझौते की कुछ शर्तों और उनके क्रियान्वयन को लेकर अभी भी दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।

प्रस्तावित समझौते के तहत सबसे अहम प्रावधान तत्काल और स्थायी युद्धविराम का है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य को 30 दिनों के भीतर दोबारा खोलने, अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ लागू नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और ईरानी तेल निर्यात पर लगे कई आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने पर सहमति बनने की बात कही जा रही है।

परमाणु कार्यक्रम पर भी बनी सहमति

समझौते के मसौदे में ईरान को शांतिपूर्ण नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम जारी रखने की अनुमति देने का प्रावधान शामिल बताया गया है। वहीं ईरान अप्रसार संधि (एनपीटी) के तहत परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराएगा। दोनों देशों के बीच अंतिम परमाणु समझौते के लिए 60 दिनों तक वार्ता चलने का प्रस्ताव है।

जब्त संपत्तियों की वापसी और प्रतिबंधों में राहत

मसौदे के अनुसार विदेशों में जमा ईरान की करीब 24 अरब डॉलर की जब्त संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी किया जा सकता है। साथ ही कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और पेट्रोलियम डेरिवेटिव्स की बिक्री पर लगे कई प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से निलंबित किए जाने की संभावना है, जिससे ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिर से तेल बेचने का अवसर मिलेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से भारत को फायदा

भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य का दोबारा खुलना माना जा रहा है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होता है। युद्ध और नाकेबंदी के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जलडमरूमध्य खुलता है और ईरानी तेल फिर से बाजार में आता है तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। इससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को राहत मिलेगी। भारतीय रिफाइनरियों को भी ईरान से अपेक्षाकृत सस्ते और अनुकूल शर्तों पर तेल खरीदने का विकल्प दोबारा मिल सकता है।

अभी भी बनी हुई है अनिश्चितता

हालांकि समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, लेकिन कई बिंदुओं पर अंतिम सहमति अभी बाकी है। विशेष रूप से ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल नीति, क्षेत्रीय सहयोगी समूहों को समर्थन और प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाने जैसे मुद्दे भविष्य की वार्ताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।फिलहाल दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते पर टिकी हैं, क्योंकि इसका असर केवल मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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