नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने 16 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तीसरे चरण की शुरुआत करने की घोषणा की है। आयोग ने इसे देशव्यापी स्तर पर चलाया जाने वाला बड़ा अभियान बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य मतदाता सूचियों को अधिक सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। तीसरे चरण के लागू होने के साथ यह प्रक्रिया देश के अधिकांश हिस्सों में प्रभावी हो जाएगी, हालांकि हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को फिलहाल इसमें शामिल नहीं किया गया है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार इन तीनों क्षेत्रों के लिए कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा। आयोग ने बताया कि यह फैसला जनगणना के दूसरे चरण के पूरा होने तथा ऊंचाई वाले और बर्फ से ढके इलाकों में मौसम संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखकर लिया गया है। आयोग ने कहा कि वर्तमान में जनगणना के तहत मकानों की सूचीकरण प्रक्रिया भी चल रही है, इसलिए साझा फील्ड मशीनरी की उपलब्धता के आधार पर कार्यक्रम तय किया गया है।
इस विशेष अभियान के तहत 3.94 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर करीब 36.73 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस कार्य में विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त लगभग 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट भी सहयोग करेंगे। आयोग ने एसआईआर को ‘सहभागी और पारदर्शी प्रक्रिया’ बताते हुए कहा कि इसमें मतदाता, राजनीतिक दल और चुनाव अधिकारी सभी की सक्रिय भूमिका होगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मतदाताओं से अपील की कि वे गणना फॉर्म भरकर इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करें। उन्होंने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में केवल पात्र मतदाताओं के नाम शामिल हों और किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में न रहे।
आयोग ने बताया कि पहले दो चरणों में 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लगभग 59 करोड़ मतदाता शामिल किए गए थे। इन चरणों में 6.3 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारियों और 9.2 लाख बूथ लेवल एजेंटों की तैनाती की गई थी। अधिकारियों के अनुसार इस अभियान का मुख्य उद्देश्य डुप्लीकेट, मृत, स्थानांतरित और अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाकर मतदाता सूची को पूरी तरह सही और विश्वसनीय बनाना है, साथ ही सभी पात्र नागरिकों को सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को भी सरल बनाया जाएगा।












