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आर्मी, नेवी और एयरफोर्स अब लड़ेंगी एक साथ, क्या है थिएटर कमांड मॉडल?

भारत की सेना में जल्द ही आजादी के बाद का सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। करीब 20 साल से अटकी थिएटर कमांड योजना अब मंजूरी के आखिरी दौर में पहुंच गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एन एस राजा सुब्रमणि जल्द ही इसका फाइनल ब्लूप्रिंट रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंप सकते हैं। अगर सरकार इस योजना को हरी झंडी दे देती है, तो सेना, नौसेना और वायुसेना के काम करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा।

अभी तीनों सेनाएं आर्मी, नेवी और एयरफोर्स अपनी-अपनी अलग कमांड के तहत काम करती हैं। अब थिएटर कमांड लागू होने के बाद किसी भी इलाके में होने वाले सैन्य ऑपरेशन की कमान सिर्फ एक कमांडर के हाथ में होगी। यानी तीनों सेनाएं अलग-अलग नहीं, बल्कि एक टीम की तरह मिलकर काम करेंगी। सरकार का कहना है कि इससे युद्ध या किसी बड़े सैन्य अभियान के दौरान फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल भी बनेगा।

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अभी कैसे काम करती हैं तीनों सेनाएं?

वर्तमान में भारत की तीनों सेनाओं के कुल 17 ऑपरेशनल कमांड हैं। इनमें सेना की सात, वायुसेना की सात और नौसेना की तीन कमांड शामिल हैं। हर सेना की अपनी अलग कमान, रणनीति और जिम्मेदारियां हैं। किसी भी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीनों सेनाएं अपने-अपने कमांड सिस्टम के तहत काम करती हैं। यही वजह है कि संयुक्त अभियानों में कई बार समन्वय और निर्णय लेने में अधिक समय लग सकता है।

क्या होगा थिएटर कमांड मॉडल?

थिएटर कमांड व्यवस्था लागू होने के बाद किसी भी इलाके की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ एक कमांडर के हाथ में होगी। उसके नेतृत्व में आर्मी, एयरफोर्स और नेवी की सभी यूनिट्स मिलकर काम करेंगी। प्रस्ताव के मुताबिक, देश में तीन बड़े थिएटर कमांड बनाए जा सकते हैं। इनमें नॉर्दर्न थिएटर कमांड चीन सीमा की निगरानी करेगा, वेस्टर्न थिएटर कमांड पाकिस्तान सीमा की जिम्मेदारी संभालेगा, जबकि मैरीटाइम थिएटर कमांड हिंद महासागर में सुरक्षा का जिम्मा उठाएगा। इसके अलावा एयर डिफेंस और सेना की सप्लाई (लॉजिस्टिक्स) व्यवस्था को भी एक साथ जोड़ने की तैयारी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन थिएटर कमांड के मुख्यालय लखनऊ, जयपुर और तिरुवनंतपुरम में बनाए जा सकते हैं।

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देश को क्या मिलेगा फायदा?

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि थिएटर कमांड लागू होने के बाद थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच तालमेल पहले से कहीं बेहतर हो जाएगा। युद्ध जैसी स्थिति में फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे, हथियारों और दूसरे संसाधनों का सही इस्तेमाल होगा और खुफिया जानकारी भी तीनों सेनाओं के बीच ज्यादा तेजी और असरदार तरीके से साझा की जा सकेगी। इससे भारत एक साथ कई मोर्चों पर दुश्मन का मुकाबला करने में पहले से ज्यादा सक्षम होगा।

हाल में रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास जैसे युद्धों ने भी दिखाया है कि आज के दौर में सिर्फ सैनिकों की संख्या नहीं, बल्कि ड्रोन, मिसाइल, साइबर और स्पेस जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ मिलकर चलाया गया संयुक्त सैन्य अभियान ही जीत की सबसे बड़ी कुंजी बन चुका है। यही वजह है कि थिएटर कमांड को भारत की रक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम माना जा रहा है।

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