अयोध्या के राम मंदिर के चंदा चोरी विवाद में स्थानीय वकीलों ने सोमवार को एक अहम फैसला लिया है। वकीलों ने आपसी सहमति के बाद एलान किया है कि वे चंदा चोरी के आरोपियों का केस नहीं लड़ेंगे। इतना ही नहीं, वकीलों की ओर से यह भी कहा गया है कि अगर कोई वकील इन लोगों का केस लेता है तो उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा। यह फैसला ऐसे वक्त में लिया गया है जब 8 आरोपियों की न्यायिक हिरासत खत्म हो रही है और 29 जून यानी सोमवार को ही इन्हें फिर से कोर्ट में पेश किया जाना है।
सोमवार सुबहर फैजाबाद के बार असोसिएशन की मीटिंग हुई और इस मीटिंग में फैसला लिया गया कि इन आरोपियों का कोई बचाव नहीं करेगा। इस मीटिंग में कई वकीलों ने तर्क रखा कि इन लोगों को सजा ही होनी चाहिए और वकील के साथ-साथ सब मानव भी हैं इसलिए इनका साथ नहीं देना चाहिए। कई वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि नैतिकता के आधार पर वे चंदा चोरी के इन आरोपियों का साथ नहीं सकते। उन्होंने कहा कि भले ही दोष बात में साबित होता है लेकिन नैतिक आधार पर ही इनका प्रतिनिधित्व करने से बचना चाहिए।
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क्या बोले अयोध्या के वकील?
वकीलों की मीटिंग के बाद अयोध्या बार असोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र ने एलान किया, ‘कोई भी वकील चंदा चोरी के आरोपियों का केस नहीं लड़ेगा। अगर कोई वकील ऐसा करता है तो उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।’ इसी तरह, साल 2005 में हुए अयोध्या आतंकी हमले के बाद भी वकीलों ने आरोपियों का केस लड़ने से इनकार कर दिया था।
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