बांदा: चार महीने से एक मजदूर की जिंदगी मानो थम सी गई है। एक तरफ पत्नी लापता है,दूसरी तरफ छह मासूम बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी। हर सुबह मजदूरी की मजबूरी और हर शाम पत्नी के लौट आने की उम्मीद… लेकिन अब तक दोनों में से कोई भी राहत उसे नहीं मिल सकी। पैलानी थाना क्षेत्र के पिपरोदर गांव निवासी शिवमंगल निषाद की शादी वर्ष 2011 में रामदुलारी के साथ हुई थी। आज उनके छह बच्चे हैं। परिवार का गुजर-बसर मजदूरी से होता है।
पीड़ित के मुताबिक, 16 मार्च 2026 को उसकी पत्नी सात वर्षीय बेटी के साथ मायके गई थी, लेकिन उसके बाद वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई। शिवमंगल का आरोप है कि उसने थाने से लेकर तहसील समाधान दिवस और अधिकारियों तक कई बार गुहार लगाई। समाधान दिवस में अपर जिलाधिकारी ने शिकायत थाना पैलानी को भेजी, लेकिन आरोप है कि जांच के लिए भी उससे ही वाहन की व्यवस्था करने को कहा गया।
दर्द से भरे शब्दों में शिवमंगल कहता है,”साहब… मैं दिहाड़ी मजदूर हूं। छह छोटे-छोटे बच्चों का पेट बड़ी मुश्किल से भरता हूं। रोज मजदूरी करूंगा तभी चूल्हा जलेगा। आखिर पुलिस के लिए गाड़ी कहां से लाऊं? मेरी पत्नी को ढूंढ दीजिए, मेरे बच्चे रोज अपनी मां को याद करके रोते हैं। “पत्नी के गायब होने के बाद परिवार पर आर्थिक और मानसिक संकट गहरा गया है। पिता अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है, जबकि घर पर मासूम बच्चे मां के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।
पीड़ित का कहना है कि अब उसे सिर्फ निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद है।उसने जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि उसकी पत्नी का जल्द पता लगाया जाए,पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
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