मऊ / गोरेलाल की मौत के बाद भड़का आक्रोश, शव सड़क पर रखकर अमिला-बोझी मार्ग जाम; बैंककर्मियों पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप
हार्ट अटैक से मौत की चर्चा, परिजनों ने वसूली के दबाव को बताया वजह
नगर पंचायत अमिला के सोनकर बस्ती निवासी गोरेलाल सोनकर (पुत्र गनई सोनकर) की मंगलवार शाम करीब चार बजे कथित तौर पर हार्ट अटैक से मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। वहीं, परिजनों और बस्ती के लोगों ने आरोप लगाया कि बैंक मित्र द्वारा लोन की रकम लिए जाने के बाद एक वर्ष से अधिक समय से फरार रहने के बावजूद बैंक की ओर से गोरेलाल पर लगातार ऋण की वसूली का दबाव बनाया जा रहा था।
बैंक मित्र पर लोन की रकम लेकर फरार होने का आरोप
परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि गोरेलाल ने उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक, अमिला से संबंधित ऋण लिया था, लेकिन बैंक मित्र लोन की रकम लेकर लंबे समय से फरार है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले की वास्तविक स्थिति और बैंक मित्र की भूमिका की जांच की जानी चाहिए। आरोप है कि रकम के संबंध में विवाद के बावजूद बैंक की ओर से मृतक से ही लगातार वसूली का दबाव बनाया जा रहा था।
लगातार दबाव से मानसिक रूप से परेशान होने का दावा
परिजनों के मुताबिक, पिछले कई महीनों से बैंक की ओर से कथित तौर पर वसूली को लेकर गोरेलाल पर दबाव बनाया जा रहा था। इससे वह मानसिक रूप से काफी परेशान चल रहे थे। परिजनों और ग्रामीणों का दावा है कि बैंककर्मियों की ओर से बार-बार दबाव बनाए जाने से उनकी परेशानी बढ़ती जा रही थी। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
मौत के बाद सड़क पर उतरे ग्रामीण, शव रखकर किया जाम
गोरेलाल की मौत की सूचना मिलते ही सोनकर बस्ती के दर्जनों महिला-पुरुष आक्रोशित हो गए। ग्रामीणों ने शव को अमिला-बोझी मार्ग पर रखकर सड़क जाम कर दिया। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। जाम के कारण मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया और लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों ने बैंक मित्र और बैंककर्मियों की भूमिका की जांच की मांग की
आक्रोशित ग्रामीणों ने बैंक मित्र पर लोन की रकम लेकर फरार होने का आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनका कहना था कि यदि बैंक मित्र ने लोन की रकम ली है तो उसकी जांच कर वास्तविक जिम्मेदार व्यक्ति से वसूली की जानी चाहिए। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि बैंक मित्र के फरार रहने के बावजूद मृतक पर ही लगातार वसूली का दबाव क्यों बनाया जा रहा था।
परिजनों ने न्याय और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उठाई मांग
मृतक के परिजनों ने मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि परिवार पहले ही अपने सदस्य की मौत से सदमे में है और अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। ग्रामीणों ने बैंक मित्र के साथ-साथ संबंधित बैंककर्मियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग उठाई।
मौके पर पहुंची पुलिस, लोगों को समझाने का प्रयास
सड़क जाम और विरोध की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों को समझाने का प्रयास शुरू किया। अधिकारियों ने मामले में उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाने की कोशिश की। पुलिस की मौजूदगी में ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे और मृतक के परिवार को न्याय दिलाने की मांग करते रहे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगा मौत का वास्तविक कारण
फिलहाल गोरेलाल की मौत का कारण परिजनों और ग्रामीणों की ओर से हार्ट अटैक बताया जा रहा है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। जांच के दौरान बैंक मित्र, लोन की रकम, वसूली प्रक्रिया और बैंककर्मियों की भूमिका समेत ग्रामीणों की ओर से लगाए गए अन्य आरोपों की भी स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर ने बताया कि घोसी थाना क्षेत्र के अमिला निवासी गोरेलाल सोनकर की धोरीघाट स्थित सीएससी में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। मृतक की पत्नी सुजाता सोनकर की ओर से थाने में दी गई तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
बताया गया कि गोरेलाल सोनकर ने अमिला स्थित यूपी ग्रामीण बैंक से लगभग 9 लाख रुपये का ऋण लिया था। आरोप है कि ऋण के संबंध में कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के बाद उनके खाते में 17 लाख रुपये का ऋण नहीं आया, जबकि इस संबंध में उन्हें नोटिस भेजा गया था। इसी मामले को लेकर वह मानसिक रूप से परेशान थे और इसी दौरान उन्हें हार्ट अटैक आया, जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। तहरीर में लगाए गए आरोपों के आधार पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है। विवेचना के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस द्वारा बैंक से संबंधित अभिलेख और रिकॉर्ड भी प्राप्त कर उनका मिलान किया जा रहा है।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या धोखाधड़ी सामने आती है और कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है, चाहे वह बैंक कर्मचारी हो या कोई बिचौलिया, उसके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।












