सिद्धार्थनगर में इटवा विकास क्षेत्र के ग्राम मुडिला शिवदत्य में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के आठवें दिन गुरुवार रात श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की मनमोहक झांकी प्रस्तुत की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मंगलगीतों के साथ “जय जय श्रीकृष्ण” के नारों से पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठा। अयोध्या धाम के कथावाचक उत्तम कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने कथा में महारास का दिव्य प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि रास का अर्थ आत्मा और परमात्मा का मिलन है, भक्त और भगवान का मिलन है। भगवान ने भक्तों को आनंद और सुख प्रदान करने तथा उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए दिव्य रास रचाया था। महाराज जी ने गोपी-उद्धव संवाद का भी श्रवण कराया। उन्होंने बताया कि उद्धव जी बृहस्पति के शिष्य और ब्रह्मज्ञानी थे, जिन्हें अपने ज्ञान का अभिमान था। इसी कारण भगवान ने उन्हें पूर्ण रूप से अपना नहीं बनाया था। उनके ज्ञान के अभिमान को तोड़ने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने उद्धव जी को वृंदावन भेजा। वृंदावन जाकर उद्धव जी के समस्त ज्ञान संबंधी भ्रम दूर हुए और वे ज्ञानी उद्धव से प्रेमी उद्धव बन गए। कथा के दौरान महाराज जी ने कंस वध की कथा भी सुनाई। कंस का वध करने के बाद भगवान गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त करने गए। उन्होंने 14 वर्ष तक मथुरा में निवास किया और उसके पश्चात द्वारिका पुरी का निर्माण कर द्वारकाधीश कहलाए। भगवान श्रीकृष्ण ने मैया रुक्मिणी के साथ दिव्य विवाह किया। मैया रुक्मिणी साक्षात लक्ष्मी स्वरूप हैं और भगवान श्रीकृष्ण साक्षात् नारायण हैं। इस प्रकार लक्ष्मी-नारायण का दिव्य विवाह संपन्न हुआ। महाराज जी ने भक्तों को अमृतमयी कथा का रसपान कराया। मुख्य यजमान राज मंगल मिश्रा रहे। आयोजक भाजपा जिला उपाध्यक्ष कृष्णा मिश्रा ने कथा में आए श्रद्धालुओं का स्वागत किया। यज्ञाचार्य पंडित शशिकांत शास्त्री थे। इस अवसर पर राधे श्याम, घनश्याम, महेश, विनायक, विशाल, शालिनी, जया सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे। पंडित वेदप्रकाश शास्त्री, शेष राम शास्त्री और अवधेश शास्त्री भी मौजूद थे।
सिद्धार्थनगर में मुडिला शिवदत्य में भागवत कथा जारी:आठवें दिन श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की झांकी, पंडाल में गूंजे जयकारे
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