नई दिल्ली/मुंबई। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर निवेश तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन की कमी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। यह बात भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन सी.एस. सेटी ने बुधवार को कही।
मुंबई में आयोजित Citi India 2026 कार्यक्रम में बोलते हुए सेटी ने कहा कि कंपनियां AI पर पूंजी निवेश करने के लिए तैयार हैं, लेकिन AI टूल्स को लागू करने और संचालित करने वाले विशेषज्ञों की उपलब्धता बाजार में बड़ी समस्या बन रही है।
उन्होंने कहा कि AI के कारण नौकरियां खत्म होने की आशंकाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उनके अनुसार असली चुनौती नौकरी खत्म होने की नहीं, बल्कि कर्मचारियों को नई तकनीक के अनुरूप तैयार करने की है। सेटी ने कहा कि आईटी क्षेत्र में अधिकांश कर्मचारी इंजीनियर हैं और उन्हें अपेक्षाकृत कम समय में नई तकनीकों के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है।
SBI चेयरमैन ने यह भी कहा कि ऑटोमेशन और तकनीकी प्रगति के कारण दुनिया भर में पूंजी निवेश और रोजगार सृजन के बीच अंतर बढ़ा है, खासकर विनिर्माण क्षेत्र में। हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि भारत का मजबूत सेवा क्षेत्र और इंजीनियरिंग प्रतिभा देश को AI परिवर्तन के दौर में आगे बढ़ने में मदद करेगी।
उन्होंने इस धारणा को भी खारिज किया कि भारत AI की दौड़ में पीछे रह गया है। सेटी के मुताबिक भारत AI तकनीक से सबसे अधिक लाभ उठाने वाले देशों में शामिल हो सकता है।
AI के उपयोग पर उन्होंने कहा कि वर्तमान में स्वास्थ्य सेवा और विनिर्माण ऐसे क्षेत्र हैं जहां जनरेटिव और एजेंटिक AI का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू हो चुका है, जिसका मुख्य उद्देश्य उत्पादकता बढ़ाना है।
डिजिटल मुद्रा (CBDC) पर बोलते हुए सेटी ने कहा कि भारत की प्राथमिकता अभी भी केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा के विकास पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि देश की विकसित डिजिटल भुगतान व्यवस्था को देखते हुए CBDC को केवल भुगतान माध्यम के रूप में स्थापित करना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए नए और उपयोगी प्रयोग विकसित करने होंगे।
उनके अनुसार लक्षित सरकारी लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer) जैसे क्षेत्रों में प्रोग्रामेबल CBDC का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि फिलहाल नीति निर्माताओं का ध्यान खुदरा और थोक CBDC ढांचे को विकसित करने पर है।












