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ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन और टॉर्चिट की नई पहल, एआई से बदलेगा दृष्टिबाधितों का जीवन


इन तकनीकों का उद्देश्य सुगम्यता और स्वतंत्र जीवन-यापन को बढ़ावा देना 

नई दिल्ली। दृष्टिबाधित व्यक्तियों को अधिक आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन ने टॉर्चिट इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से कई अत्याधुनिक एआई-संचालित सहायक प्रौद्योगिकियों का शुभारंभ किया।
इनमें वायरलेस ज्योति एआई विज़न ग्लासेज़, ज्योति एआई वेब, एडवांस्ड फोल्डेबल स्मार्ट व्हाइट केन, एनेबलमार्ट एक्सपीरियंस एंड रिसोर्स सेंटर तथा एनेबलमार्ट असिस्टिव टेक्नोलॉजी रिसोर्स बुक शामिल हैं। इन तकनीकों का उद्देश्य दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए सुगम्यता, समावेशी शिक्षा और स्वतंत्र जीवन-यापन को बढ़ावा देना है। 
कार्यक्रम का उद्घाटन दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD), सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव मनमीत कौर नंदा ने किया। उन्होंने कहा कि सहायक प्रौद्योगिकी शिक्षा, रोजगार, गतिशीलता और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने का प्रभावी माध्यम बन चुकी है। उन्होंने सरकार की आगामी दिव्यांग सहारा योजना और पर्पल इकोनॉमी की परिकल्पना के माध्यम से एआई आधारित सहायक तकनीकों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई।
टॉर्चिट इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं निदेशक हनी भगचंदानी ने संस्था के नवीनतम नवाचारों का प्रदर्शन करते हुए कहा कि कंपनी का लक्ष्य किफायती, स्वदेशी और एआई-संचालित सहायक प्रौद्योगिकियों के माध्यम से दिव्यांगजनों को सशक्त बनाना है। उन्होंने एनेबलमार्ट एक्सपीरियंस एंड रिसोर्स सेंटर, असिस्टिव टेक्नोलॉजी रिसोर्स बुक तथा टॉकिंग और टैक्टाइल पुस्तकों की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला।
ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन के कार्यकारी सचिव डेविड ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि टॉर्चिट के साथ यह साझेदारी सहायक प्रौद्योगिकियों को अधिक किफायती, सुलभ और प्रभावी बनाएगी तथा समावेशी शिक्षा एवं पुनर्वास सेवाओं को नई मजबूती प्रदान करेगी।
टॉर्चिट फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. होमियार मोबेडजी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए शिक्षा, सूचना और दैनिक जीवन को पहले से अधिक सुलभ बना रही है। उन्होंने तकनीकी नवप्रवर्तकों, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नागरिक समाज के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के डॉ. राजेन्द्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र के प्रोफेसर डॉ. सूरज सेनजाम ने किफायती ‘मेक इन इंडिया’ सहायक प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता पर बल देते हुए बताया कि एआईआईएमएस और टॉर्चिट के बीच एआई आधारित समाधानों के उपयोगकर्ता मूल्यांकन को लेकर सहयोग जारी है। 
कार्यक्रम का समापन वायरलेस ज्योति एआई विज़न ग्लासेज़ और ज्योति एआई वेब के लाइव प्रदर्शन के साथ हुआ। इस अवसर पर सरकार, स्वास्थ्य संस्थानों, तकनीकी विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने अधिक सुगम, समावेशी और सशक्त भारत के निर्माण के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प दोहराया।

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