- नगर निगम ने 240 अवैध निर्माण चिह्नित किए जिनमें ज्यादातर वकीलों के चैंबर
लखनऊ। रविवार जिला कोर्ट के बाहर दोपहर जमकर हंगामा हुआ। बुलडोजर से चैंबर तोड़े जाने के विरोध में वकील भड़क गए। कई वकील बुलडोजर के सामने खड़े हो गए। पुलिस अफसरों ने हटाने की कोशिश की, तो बहस होने लगी। बहस बढ़ी, तो पुलिस ने वकीलों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर लाठियां बरसाईं। इस दौरान भीड़ में से कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। पुलिसवाले भी पत्थर उठाते नजर आए।
दरअसल, हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट के बाहर अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। नगर निगम ने 240 अवैध निर्माण चिह्नित किए थे। इनमें ज्यादातर वकीलों के चैंबर और दुकानें हैं। रविवार सुबह 9 बजे नगर निगम की टीम 10 बुलडोजर और 300 पुलिसवालों के साथ पहुंची। टीम ने करीब 90 चैंबर तोड़ दिए।

नगर निगम की टीम चैंबर में लगी चटाइयां और कुर्सियां को गाड़ियों में भरकर ले गई। कार्रवाई के दौरान ही एक वकील ने चैंबर बंद कर फंदे से लटकने की कोशिश की। पुलिसकर्मियों ने बगल का चैंबर तोड़कर उसे बाहर निकाला। एक अन्य वकील पुलिस के सामने हाथ जोड़कर चैंबर न तोड़ने की गुहार लगाता रहा। साल 2020 में सदर तहसील इलाके में वकीलों के कुछ चैंबर तोड़े गए थे। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने यूपी सरकार से जवाब मांगा था। पूछा था कि वकीलों के लिए पुनर्वास की क्या व्यवस्था की गई? इसके बाद अक्टूबर- 2025 में लखनऊ सिविल कोर्ट परिसर में सेंट्रल बार एसोसिएशन से जुड़े कुछ वकीलों के अस्थायी चैंबर प्रशासन ने तोड़ दिए। इसका वकीलों ने विरोध किया था। जनवरी- 2026 में कोर्ट परिसर के बाहर अवैध कब्जों को लेकर लगातार शिकायतें आने लगीं।
इसी दौरान वकील सुनीता सिंह समेत अन्य लोगों ने चैंबरों और अतिक्रमण को लेकर कोर्ट में याचिकाएं दायर की 7 मई को हाईकोर्ट ने अतिक्रमण तोड़ने का आदेश दिया। 12 मई को नगर निगम की टीम ने अवैध चैंबरों और ढांचों पर लाल रंग का निशान (क्रॉस) लगाया। नोटिस जारी कर 16 मई तक अवैध अतिक्रमण खाली करने का निर्देश दिया। इसके बाद रविवार को नगर निगम की टीम बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंच गई।












