Homeजिला / लोकल (Local News)महिला-बाल साइबर अपराधों पर सख्त हुआ केंद्र,एनसीआपी पोर्टल पर बढ़ते मामलों से...

महिला-बाल साइबर अपराधों पर सख्त हुआ केंद्र,एनसीआपी पोर्टल पर बढ़ते मामलों से बढ़ी चिंता


  • पहचान न होने पर भी शिकायत बंद करने पर रोक
  • आपत्तिजनक कंटेंट हटाने और जांच के आदेश

नई दिल्ली। महिलाओं और बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों को लेकर केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि गुमनाम शिकायतों को केवल ‘पीड़ित की पहचान नहीं’ होने के आधार पर बंद न किया जाए। गृह मंत्रालय ने कहा है कि ऐसे मामलों में कार्रवाई अनिवार्य होगी, खासकर जब शिकायतें बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएम), ऑनलाइन अश्लीलता या यौन उत्पीड़न से संबंधित हों।

सरकारी समीक्षा में यह गंभीर तथ्य सामने आया कि कई राज्यों की एजेंसियां नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआपी) पर दर्ज गुमनाम शिकायतों को बिना किसी प्रारंभिक जांच के ही बंद कर रही थीं। इन मामलों में यह तर्क दिया जा रहा था कि शिकायतकर्ता या पीड़ित की पहचान स्पष्ट नहीं है, इसलिए आगे कार्रवाई संभव नहीं है। केंद्र ने इस प्रवृत्ति को गंभीर लापरवाही मानते हुए इसे तुरंत रोकने के निर्देश दिए हैं।

गृह मंत्रालय के अनुसार, साइबर अपराधों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और इनमें महिलाओं व बच्चों को निशाना बनाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में पहचान का अभाव जांच में बाधा नहीं बन सकता। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यदि किसी शिकायत में आपत्तिजनक सामग्री, यौन शोषण के संकेत या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अवैध गतिविधियों का उल्लेख है, तो संबंधित एजेंसियों को प्राथमिकता के आधार पर उस सामग्री को हटाने और जांच शुरू करने की जिम्मेदारी निभानी होगी।

संसद में प्रस्तुत आंकड़े इस बढ़ती समस्या की गंभीरता को दशार्ते हैं। बाल अश्लीलता या सीएसएम से जुड़ी शिकायतें वर्ष 2021 में 2,109 से बढ़कर 2025 में 10,431 तक पहुंच गई हैं, जो लगभग पांच गुना वृद्धि को दशार्ती हैं। इसी तरह फर्जी या प्रतिरूप प्रोफाइल के मामलों में भी तेज उछाल आया है, जो 15,843 से बढ़कर 46,784 तक पहुंच गए। साइबर बुलिंग, स्टॉकिंग और सेक्सटिंग जैसे अपराधों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिनकी संख्या 21,589 से बढ़कर 45,832 हो गई है।

हालांकि प्रोफाइल हैकिंग और पहचान चोरी के मामलों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में 38,297 के स्तर पर पहुंचे ये मामले 2025 में घटकर 34,533 रह गए। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि कुल मिलाकर साइबर अपराधों का खतरा लगातार बढ़ रहा है और इससे निपटने के लिए अधिक सक्रिय और तकनीकी रूप से सक्षम तंत्र की आवश्यकता है।

नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल को इस उद्देश्य से विकसित किया गया है कि नागरिक, विशेषकर महिलाएं और बच्चे, बिना किसी डर या सामाजिक दबाव के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। इस पोर्टल पर गुमनाम शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध है, ताकि वे लोग भी सामने आ सकें जो पहचान उजागर होने के डर से शिकायत करने से हिचकते हैं।

सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में गुमनाम शिकायतों में पर्याप्त जानकारी होने के बावजूद संबंधित आॅनलाइन कंटेंट को हटाने या उसके स्रोत की जांच करने के बजाय सीधे शिकायत बंद कर दी गई। इससे अपराधियों को बच निकलने का मौका मिला और आपत्तिजनक सामग्री लंबे समय तक इंटरनेट पर बनी रही।

केंद्र ने स्पष्ट कर दिया है कि इस तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए कंटेंट की पहचान करें, स्रोत का पता लगाएं और आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन निदेर्शों का सख्ती से पालन किया गया, तो इससे पीड़ितों का भरोसा बढ़ेगा और अधिक लोग आगे आकर शिकायत दर्ज करेंगे। अब यह देखना अहम होगा कि राज्यों द्वारा इन निर्देशों को जमीनी स्तर पर कितनी गंभीरता से लागू किया जाता है और क्या इससे साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लग पाता है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments