HomeHealth & Fitnessबिजली विभाग की लापरवाही पर आयोग सख्त, उपभोक्ता को मिली राहत

बिजली विभाग की लापरवाही पर आयोग सख्त, उपभोक्ता को मिली राहत

पूर्वी सिंहभूम। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बिजली विभाग की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाते हुए शनिवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि वर्षों तक नियमित बिजली बिल जारी नहीं करना और बाद में एकमुश्त भारी बकाया थोपना उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है। आयोग ने इस मामले को सेवा में गंभीर कमी मानते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।

यह मामला चाईबासा के जेवियर नगर निवासी देवी शंकर दत्ता से जुड़ा है। उन्होंने आयोग में शिकायत दर्ज कर बताया था कि वर्ष 2018 में बिजली कनेक्शन लेने के बाद उन्हें नियमित रूप से मासिक बिजली बिल नहीं दिया गया।

कई वर्षों तक विभाग की ओर से कोई स्पष्ट बिलिंग नहीं हुई,लेकिन दिसंबर 2024 में अचानक बिजली अधिनियम की धारा 56 के तहत नोटिस जारी कर एक लाख,तिरासी हजार,175 रुपये की बकाया राशि 15 दिनों के भीतर जमा करने को कहा गया। साथ ही भुगतान नहीं करने पर बिजली काटने की चेतावनी भी दी गई।

शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि विभागीय दबाव के कारण उन्होंने पहले 50 हजार रुपये जमा किए और बाद में जून 2025 में अलग-अलग तिथियों पर 60 हजार रुपये और भुगतान किए। इस तरह कुल 1 लाख 10 हजार रुपये जमा करने के बावजूद विभाग ने उन्हें नियमित माहवार बिजली बिल उपलब्ध नहीं कराया।

सुनवाई के दौरान झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड ने स्वीकार किया कि उपभोक्ता के नाम पर 5 किलोवाट का कनेक्शन है तथा वर्ष 2024 में एकमुश्त बिल जारी किया गया था। हालांकि विभाग यह स्पष्ट नहीं कर सका कि वर्ष 2018 से नियमित मासिक बिल क्यों नहीं भेजे गए।

जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह ने अपने आदेश में कहा कि लंबे समय तक बिल जारी नहीं करना उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत सेवा में स्पष्ट कमी है। आयोग ने यह भी माना कि बिना माहवार विवरण दिए अचानक बड़ी राशि की मांग करना मनमाना और कानून के विरुद्ध है।

आयोग ने अपने फैसले में सर्वोच्च न्यायालय के चर्चित मामले अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड बनाम रहमतुल्लाह खान (2020) का हवाला दिया।

आयोग ने कहा कि दो वर्ष से अधिक पुराने बिजली बकाये की वसूली तभी संभव है,जब संबंधित राशि लगातार उपभोक्ता के बिलों में दर्शाई गई हो। चूंकि विभाग ऐसा कोई रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर पाया,इसलिए एकमुश्त बकाया मांग को वैध नहीं माना जा सकता।

आयोग ने बिजली विभाग को निर्देश दिया कि 1 दिसंबर 2018 से 5 दिसंबर 2024 तक का संशोधित माहवार बिजली बिल वास्तविक मीटर रीडिंग अथवा नियमानुसार औसत खपत के आधार पर तैयार कर उपभोक्ता को उपलब्ध कराया जाए। साथ ही पुरानी अवधि पर किसी भी प्रकार का विलंब अधिभार नहीं लगाने का आदेश दिया गया।

इसके अलावा आयोग ने विभाग को यह भी निर्देश दिया कि उपभोक्ता द्वारा जमा किए गए 1 लाख 10 हजार रुपये की राशि समायोजित की जाए और संशोधित बिल जारी होने तक बिजली आपूर्ति बाधित न की जाए।

मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना को गंभीर मानते हुए आयोग ने बिजली विभाग को संयुक्त रूप से 25 हजार रुपये मुआवजा और 5 हजार रुपये वाद व्यय उपभोक्ता को देने का आदेश दिया है।

आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन नहीं किया गया तो उक्त राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

 

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