गुवाहाटी। असम में बाढ़ से अभी भी सात जिले बुरी तरह से प्रभावित हैं। प्रभावित जिलों में चराईदेव, शिवसागर, धेमाजी, गोलाघाट, बिश्वनाथ, जोरहाट और लखीमपुर शामिल हैं।
बाढ़ से इन जिलों के 24 राजस्व मंडलों के कुल 380 गांवों की 128071 आबादी प्रभावित है। एवं 14230.148 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूबी हुई है।
बाढ़ की विनाशलीला ऊपरी असम के मुख्य रूप से चार जिलों शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट एवं गोलाघाट में देखी जा रही है। सबसे अधिक शिवसागर जिले की स्थिति सबसे अधिक खराब है।
पानी और कीचड़ लोगों के घरों में और रास्तों में अभी भी भरा हुआ है। सरकार के साथ ही स्वयंसेवी संगठन एवं अपने स्तर पर लोग प्रभावित इलाकों में पहुंचकर राहत कार्य में अपनी मदद कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा उपरी असम में बीती 2 अगस्त से डेरा डाले हुए हैं। राहत कार्य को तेज करने के लिए सभी पहलुओं की निगरानी कर रहे हैं।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तीन अगस्त के आंकड़ों के अनुसार, धनसिरि नदी (नुमलीगढ़) इलाके में खतरे के निशान से अभी भी ऊपर बह रही है।
इस बीच सोमवार को शिवसागर जिले से दो और लोगों के शव बरामद हुए। इस तरह बाढ़ से राज्य में मृतकों की कुल संख्या 87 पहुंच गई है।
सरकार ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 38 राहत शिविर एवं 17 राहत वितरण केंद्र समेत कुल 55 शिविर क्रियान्वित रखे हैं। राहत शिविरों में 11066 लोग आश्रय लिए हुए हैं। जबकि राहत वितरण केंद्रों पर 184 गैर-शिविर निवासी राहत प्राप्त कर रहे हैं।
बाढ़ में राहत एवं बचाय अभियान में एसडीआरएफ, सेना/अर्धसैनिक बल, एनडीआरएफ, डीडीआरएफ, एयर फोर्स, पुलिस, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं (एफ एंड ईएस), सर्कल कार्यालय/स्थानीय प्रशासन, नागरिक सुरक्षा/प्रशिक्षित स्वयंसेवक और अग्निशमन विभाग जुटा हुआ है।
इस बीच बाढ़ प्रभावित इलाकों में शनिवार को राज्य सरकार ने कुल 76 मेडिकल टीमों को तैनात किया। इस दौरान 23 नावें भी राहत कार्य में जुटी रहीं।
बाढ़ से बड़े पैमाने पर सड़क, पुल एवं अन्य आधारभूत ढांचे को नुकसान पहुंचा है। इसकी मरम्मत के लिए सरकार लगातार समीक्षा बैठक कर हालात का जायजा ले रही है।












