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छह साल से बंद सामुदायिक शौचालय बना खंडहर:दरवाजों में जंग और परिसर में उगी झाड़ियां; ग्रामीण बोले- खुले में शौच की मजबूरी


बदला चौराहा स्थित बैजनाथपुर गांव में लाखों रुपये की लागत से बना सामुदायिक शौचालय छह साल से अधिक समय से बंद पड़ा है। देखरेख के अभाव में भवन अब जर्जर होकर खंडहर में तब्दील हो चुका है। परिसर में ग्रामीण लकड़ियां और उपले रखने लगे हैं। एक ओर सरकार खुले में शौच मुक्त अभियान को लेकर लगातार जागरूकता और खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर गांव में बना यह शौचालय वर्षों से उपयोग का इंतजार कर रहा है। छह साल में एक बार भी नहीं खुला ताला ग्रामीणों के मुताबिक, सामुदायिक शौचालय का निर्माण करीब छह साल से अधिक पहले कराया गया था। निर्माण के बाद से ही इसका नियमित संचालन नहीं हो सका। लंबे समय तक बंद रहने के कारण भवन और उसके अंदर लगे उपकरण धीरे-धीरे खराब होते चले गए। अब स्थिति यह है कि शौचालय अपनी मूल उपयोगिता ही खो चुका है। दरवाजे जंग खाकर हुए खराब, परिसर में झाड़ियां शौचालय के लोहे के दरवाजे जंग लगने से टेढ़े हो चुके हैं। फर्श पर जगह-जगह घास और झाड़ियां उग आई हैं। दीवारों पर स्वच्छता को लेकर लिखे गए नारे भी अब मिटने लगे हैं। भवन की बदहाली देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि लंबे समय से इसकी साफ-सफाई और देखरेख नहीं हुई है। पानी की टंकी और पाइपलाइन भी कबाड़ सामुदायिक शौचालय में लोगों की सुविधा के लिए पानी की टंकी, पाइपलाइन और अन्य जरूरी उपकरण लगाए गए थे। लेकिन वर्षों से बंद रहने के कारण ये उपकरण भी खराब होने की कगार पर पहुंच गए हैं। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद सुविधा ग्रामीणों के किसी काम नहीं आ रही है। शौचालय बना ग्रामीणों के लिए कबाड़ रखने की जगह उपयोग नहीं होने के कारण शौचालय परिसर का इस्तेमाल अब ग्रामीण दूसरी जरूरतों के लिए कर रहे हैं। परिसर में लकड़ियां और उपले रखे जा रहे हैं। इससे साफ है कि जिस भवन को ग्रामीणों की स्वच्छता और सुविधा के लिए बनाया गया था, वह अब उपेक्षा के कारण कबाड़ रखने की जगह बन गया है। महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण राहुल, विनोद, जय प्रसाद और संगत ने बताया कि शौचालय बनने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि गांव में खुले में शौच की समस्या खत्म होगी। लेकिन छह साल से अधिक समय बीतने के बाद भी इसका लाभ नहीं मिल सका। ग्रामीणों के अनुसार गरीब परिवारों, बुजुर्गों और खासकर महिलाओं को आज भी खुले में शौच के लिए मजबूर होना पड़ता है। ग्रामीणों ने की तत्काल शुरू कराने की मांग ग्रामीणों ने प्रशासन से सामुदायिक शौचालय की स्थिति का तत्काल निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि भवन की मरम्मत, पानी की व्यवस्था और जरूरी उपकरणों को दुरुस्त कराकर इसे दोबारा चालू कराया जाए, ताकि सरकारी धन से बनाई गई सुविधा का लाभ ग्रामीणों को मिल सके और खुले में शौच की समस्या से राहत मिले।

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