सिद्धार्थनगर में पंचायत व्यवस्था से जुड़े दो मामले सामने आए हैं। एक ओर ग्राम पंचायत सचिवों के क्लस्टर आवंटन में अनियमितताओं की शिकायत पर हुई जांच में तीन बिंदुओं पर गड़बड़ी की पुष्टि भी हुई है, वहीं दूसरी ओर करोड़ों रुपये के कथित घोटाले की नई शिकायत पर अब तक कोई प्रारंभिक जांच भी शुरू नहीं की गई है। मामला नौगढ़ विकास खंड के ग्राम पलिया निधि का है। गांव के ही दुर्गेश कुमार मिश्रा द्वारा 12 जनवरी 2026 को पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव को भेजे गए शिकायती पत्र से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जिला पंचायती राज अधिकारी (डीपीआरओ) ने 06 जनवरी 2022 के शासनादेश का उल्लंघन करते हुए मनमाने ढंग से क्लस्टर आवंटन किया। शिकायतकर्ता ने बताया था कि 25 से 30 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायतों को एक ही सचिव को सौंप दिया गया, जिससे सचिवों की जमीनी उपस्थिति प्रभावित हुई। इसके कारण ग्रामीणों को जन्म, मृत्यु, आय और निवास प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक कार्यों के लिए भटकना पड़ रहा है। शिकायत में दूरी के तथ्यों को छिपाकर प्रस्तावों को अनुमोदित कराने और धन उगाही के भी आरोप लगाए गए थे। इस शिकायत पर 24 जनवरी 2026 को जांच के आदेश दिए गए, जिसकी जिम्मेदारी जिला विकास अधिकारी को सौंपी गई। 30 मार्च 2026 को प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया कि कई क्लस्टरों में भौतिक दूरी का ध्यान नहीं रखा गया था। जांच में पाया गया कि एक ही सचिव को लगभग 30 किलोमीटर की दूरी वाले क्लस्टर आवंटित किए गए थे। क्लस्टर संख्या 07 और 04 में भी दूर स्थित ग्राम पंचायतों को नियमों के विपरीत जोड़ा गया था। इस प्रकार, तीन प्रमुख बिंदुओं पर शिकायत सही साबित हुई, लेकिन इसके बावजूद आज तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं, करोड़ों रुपये के कथित घोटाले की दूसरी शिकायत पर भी कुछ सामने नहीं आया। इसी बीच एक मामला सामने आया, मुख्यालय स्थित अंकित सिंह द्वारा 29 अप्रैल को जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन को नोटरी एफिडेविट और साक्ष्यों के साथ शिकायत दी गई, जिसमें नौगढ़ विकास खंड के सेमरियाव, हरदासपुर, रसूलपुर, रामपुर, रामगढ़ तथा शोहरतगढ़ विकास खंड के टेड़िया ग्राम पंचायतों में स्ट्रीट लाइट, डस्टबिन, इंटरलॉकिंग, सीसी बेंच और अन्य कार्यों के नाम पर लाखों से लेकर करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाया गया, शिकायत में कहा गया कि स्ट्रीट लाइट, आरसीसी बेंच और डस्टबिन की कीमतों में चार से पांच गुना तक बढ़ोतरी कर भुगतान किया गया, जिससे सरकारी धन की भारी क्षति हुई। जिलाधिकारी द्वारा इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायती राज अधिकारी को जांच टीम गठित कर जांच के आदेश दिए गए, लेकिन शिकायत के छह दिन बीत जाने के बाद भी न तो कोई जांच टीम गठित की गई और न ही प्रारंभिक जांच शुरू कराई गई, जबकि शिकायत नोटरी एफिडेविट और साक्ष्यों के साथ की गई थी। मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट अभी मुझे प्रस्तुत नहीं की गई है। जांच रिपोर्ट मंगाकर अवलोकन कर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं जिला विकास अधिकारी ने 30 अप्रैल 2026 को मुख्य विकास अधिकारी को जांच रिपोर्ट प्रेषित की है। 29 अप्रैल को नोटरी एफिडेविट व साक्ष्यों के साथ जिलाधिकारी को 6 ग्राम पंचायत विकासखंड नगर क्षेत्र के रसूलपुर, सेमरियाव, हरदासपुर, रामपुर, रामगढ़ तथा विकासखंड शोहरतगढ़ के टेड़िया में स्ट्रीट लाइट, डस्टबिन, आरसीसी बेंच को मार्केट से 4 से 5 गुना दर दिखाकर भुगतान किए जाने व साफ-सफाई प्रथम श्रेणी में भी धांधली किए जाने की शिकायत दी गई थी।
जिलाधिकारी ने 29 अप्रैल को जिला पंचायती राज अधिकारी वाचस्पति झा को जांच टीम गठित करने के आदेश दिए थे, लेकिन 7 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक न तो प्रारंभिक तौर पर जांच की गई और न ही कोई जांच टीम गठित की गई। इस पर जिला पंचायती राज अधिकारी वाचस्पति झा का कहना है कि अभी मैं कुछ काम से बाहर हूं, आते ही जांच टीम गठित की जाएगी।












