रामपुर:जिले में जलीय कृषि (मत्स्य पालन) में मछलियों को चारे के रूप में वधशालाओं का कचरा,पोल्ट्री कचरा और पशुओं के शवों व उनके अंगों को खिलाने पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगा दी गई है।सार्वजनिक स्वास्थ्य और जल की गुणवत्ता को गंभीर खतरे से बचाने के लिए जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने 8 मई को यह सख्त आदेश जारी किया है।वैज्ञानिक साक्ष्यों में स्पष्ट रूप से पाया गया है कि मछलियों को खिलाए जा रहे इस प्रकार के कचरे के उपयोग से उनमें साल्मोनेला और ई. कोली जैसे हानिकारक बैक्टीरिया पनपते हैं,जो सीधा मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा हैं।
केंद्र के शासनादेश पर लिया गया कड़ा संज्ञान
भारत सरकार के मत्स्य पालन,पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन मंत्रालय (मत्स्य पालन विभाग) द्वारा बीते 23 अप्रैल को अपशिष्ट पदार्थों के उपयोग पर प्रतिबंध को लेकर शासनादेश जारी किया गया था।इसके अनुपालन में उप निदेशक मत्स्य,मुरादाबाद मण्डल ने भी 29 अप्रैल को आदेश जारी किए।इसी क्रम में रामपुर जिलाधिकारी ने जिले के समस्त मत्स्य पालकों और हैचरी संचालकों को कड़े निर्देश देते हुए प्रतिबंधित कचरे के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
तालाबों की होगी नियमित चेकिंग,दोषियों पर होगा एक्शन
इस महत्वपूर्ण आदेश को धरातल पर कड़ाई से लागू कराने के लिए संबंधित क्षेत्र के मत्स्य निरीक्षक और क्षेत्रीय अधिकारियों को नियमित रूप से तालाबों और मत्स्य पालन केन्द्रों का निरीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।चेकिंग के दौरान यदि किसी भी फार्म पर मछलियों के चारे के रूप में प्रतिबंधित कचरे का उपयोग होता पाया गया,तो उनके विरूद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।इसके अलावा,रामपुर मत्स्य विभाग को क्षेत्र स्तर की प्रथाओं का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण करते हुए इस आदेश के अनुपालन की एक ‘कार्यवाही रिपोर्ट’ भी तैयार करने को कहा गया है,जिसे निर्धारित समय सीमा के भीतर शासन को भेजा जाएगा।
किसानों को किया जाएगा जागरूक,’फॉर्म्युलेटेड एक्वा फीड’ पर जोर
प्रतिबंध लागू करने के साथ ही मत्स्य विभाग रामपुर के क्षेत्रीय अधिकारी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सघन जागरूकता और संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित करेंगे।इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य किसानों को पशु-आधारित कचरे से होने वाले जोखिमों के बारे में शिक्षित करना और सुरक्षित चारे के महत्व को समझाना है।विभाग द्वारा मत्स्य पालकों और हैचरी संचालकों को केवल गुणवत्ता आश्वासित और पोषण की दृष्टि से संतुलित “फॉर्म्युलेटेड एक्वा फीड” का ही उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।साथ ही,उन्हें सुरक्षित मत्स्य पालन प्रथाओं को अपनाने के लिए भी जागरूक किया जाएगा।











