बख्शी का तालाब। क्षेत्र में चंद्रिका देवी मार्ग पर सरकारी ट्यूबवेल के पास बेशकीमती सागौन के पेड़ों का अवैध रूप से कटान किया गया। जिसमें स्थानीय वन दरोगा की मिलीभगत और विरोधाभासी बयानों पर गंभीर सवाल उठे। स्थानीय लोगों ने वन विभाग और लकड़कट्टों की साठगांठ का आरोप लगाते हुए इस मामले में उच्चाधिकारियों से जांच की मांग की ।
बताया जा रहा है कि, क्षेत्रीय वन दरोगा मुबारक अली की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। जब मीडिया और जागरूक नागरिकों ने कटान के संबंध में उनसे जानकारी मांगी, तो उनके बयानों में भारी विरोधाभास देखने को मिला। सुबह के समय मुबारक अली ने 40 पेड़ों का परमिट होने की बात कही, लेकिन दोपहर होते-होते उन्होंने किसी अन्य व्यक्ति को 80 पेड़ों के कटान का परमिट जारी होने का दावा किया। एक ही स्थान और एक ही दिन में परमिट की संख्या में आया यह दोगुना अंतर विभागीय पारदर्शिता पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है। यह कटान अमित अरोड़ा नामक व्यक्ति द्वारा कराया जा रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि,जब भी वन दरोगा मुबारक अली से इस अवैध कटान पर सवाल किया जाता है, तो वे कभी किसी मौजूदा मंत्री तो कभी किसी रिटायर्ड अधिकारी की “बाग” बताकर मामले से पल्ला झाड़ लेते हैं। बड़े नामों का सहारा लेकर अधिकारियों द्वारा खुद को इस संवेदनशील मसले से अलग करने की कोशिशों ने मिलीभगत की आशंकाओं को और पुख्ता कर दिया ।
इलाके के लोगों में इस कटान को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि, सरकारी संपत्ति और पर्यावरण की रक्षा करने वाले ही जब भक्षक बन जाएं, तो हरियाली को बचाना मुश्किल होगा। बिना उचित जांच और बिना स्पष्ट परमिट के इतने बड़े पैमाने पर सागौन जैसे प्रतिबंधित पेड़ों का कटना एक बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ,यह विनाश “विकास” की आड़ में वन विभाग के कुछ अधिकारियों और लकड़कट्टों की गहरी मिलीभगत से अंजाम दिया गया।












