कानपुर । राजधानी के आलमनगर स्थित गुरुकुल में 11 वर्षीय दिव्यांश की मौत ने शिक्षा संस्थानों की सच्चाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि मासूम को एक-दो नहीं, बल्कि लगातार चार दिनों तक बेरहमी से प्रताड़ित किया गया।रिपोर्ट के मुताबिक, दिव्यांश के शरीर पर 39 से 40 गहरे चोट के निशान मिले हैं। उसे डंडे, बेल्ट और थप्पड़ों से पीटा गया, यहां तक कि सजा के तौर पर एक दिन बिना कपड़ों के भी रखा गया। यह सब “अनुशासन” के नाम पर किया जा रहा था।
अंदर का खौफनाक सिस्टम उजागर
गुरुकुल के स्टाफ के मुताबिक, आरोपी संचालक कन्हैया मिश्रा बच्चों को सजा देने के नाम पर खाना तक नहीं देता था। दिव्यांश को भी कई दिनों तक लगातार प्रताड़ना झेलनी पड़ी, जो आखिरकार उसकी मौत का कारण बन गई।
सबूत मिटाने की कोशिश
जांच में यह भी सामने आया कि घटना के बाद गुरुकुल के CCTV कैमरों से छेड़छाड़ की गई और DVR गायब कर दिया गया। पुलिस ने इस मामले में हर्षिता सोनी को भी गिरफ्तार किया है, जिस पर सबूत मिटाने और बच्चों को हटाने का आरोप है।
आरोपी का कबूलनामा
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि बचपन में उसके साथ भी इसी तरह की सख्ती होती थी और उसी मानसिकता में उसने बच्चे को पीटा। “गुस्से में पिटाई करते-करते उसकी जान चली गई”—यह बयान पूरे मामले की भयावहता को उजागर करता है।
गुस्से में परिजन, न्याय की मांग
मासूम का शव गांव पहुंचते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने आरोपी के खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा की मांग की। प्रशासन के आश्वासन के बाद ही अंतिम संस्कार किया गया।












