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छावनी क्षेत्र के चेस्ट फिजीशियन डॉ. राहुल सिंह ने कहा कि अस्थमा एक नियंत्रित होने वाली बीमारी है, लेकिन समय पर पहचान और इलाज न होने पर यह गंभीर रूप ले सकती है। उन्होंने यह बातें छावनी कस्बे से सटे सिरौली बाबू गांव में आयोजित जागरूकता शिविर के दौरान कहीं। उन्होंने बताया कि अस्थमा छोटे-बड़े और बुजुर्ग सभी को प्रभावित कर सकता है। बीमारी ज्यादा गंभीर होने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि “अस्थमा से नहीं, बल्कि लापरवाही से मौत होती है।” डॉ. राहुल ने बताया कि रात में बार-बार खांसी आना, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज (विजिंग) आना और हल्की मेहनत में भी सांस फूलना इसके प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे संकेत दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि मई माह के पहले मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना है। इनहेलर सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपचार डॉ. राहुल सिंह ने कहा कि इनहेलर को लेकर समाज में कई भ्रांतियां फैली हुई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इनहेलर की कोई लत नहीं लगती, बल्कि यह सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपचार है, जो सीधे फेफड़ों तक दवा पहुंचाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अस्थमा के लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय पर जांच व नियमित उपचार कराएं, ताकि मरीज सामान्य जीवन जी सकें।
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‘अस्थमा से नहीं, लापरवाही से होती है मौत’:बस्ती में चेस्ट फिजीशियन राहुल सिंह बोले- इनहेलर सीधे फेफड़ों तक दवा पहुंचाता है
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