कौवे : दुनिया भर में अक्सर यह नजर आता है कि जब किसी कौवे की मौत हो जाती है, तो उसके आसपास के कई कौवे जमा होते हैं। इस सीन को अधिकतर लोग ‘कौवों का अंतिम संस्कार’ या Crow Funeral समझते हैं। हालांकि, पहली नजर में यह जरूर किसी शोक सभा जैसा लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक, कौवों का यह व्यवहार असलियत में एक अहम Survival Strategy है।
कौवे अपने साथी की मौत की करते हैं जांच
रिसर्चर्स के अनुसार, कौवे इस दौरान किसी खास तरह की रस्म का पालन नहीं कर रहे होते, बल्कि वे अपने साथी की मुत्यु के वजहों की जांच करते हैं। इस प्रोसेस को एक प्रकार की ‘जासूसी’ के तौर पर देखा जाता है, जहां कौवे यह समझने का प्रयास करते हैं कि आसपास में कोई खतरा या शिकारी तो मौजूद नहीं है। इससे उन्हें फ्यूचर में उसी प्रकार के खतरे से बचने में सहायता मिलती है।
साथी को मृत देख देते हैं ‘अलार्म कॉल’
गौरतलब है कि कौवे अपनी बुद्धिमत्ता के लिए मशहूर होते हैं। वे ना केवल अपने साथी की मौत के घटनास्थल को याद रखते हैं, बल्कि उस डेंजर से जुड़े व्यक्ति या जीव का फेस भी पहचान लेते हैं। यही कारण है कि वे लंबे वक्त तक अपनी पूरी टोली को सावधान कर सकते हैं। जब भी कोई कौवा अपने मृत साथी को देखता है, तो जोर-जोर से आवाज लगाकर वह दूसरों को भी बुला लेता है, जिसे ‘अलार्म कॉल’ कहते हैं। इसके बाद कई कौवे वहां जमा होकर करीब 15-20 मिनट तक आसपास के इलाके का निरीक्षण करते हैं।
मृत साथी के चारों तरफ लगाते हैं चक्कर
इस दौरान, बाकी कौवे, मृत साथी के चारों तरफ चक्कर लगाते हैं और शोर मचाते हैं, लेकिन आमतौर पर उसको छूते नहीं हैं, ताकि किसी इन्फेक्शन से बच सकें। हालांकि, कुछ मामलों में कौंवों को अपने मृत साथी पर टहनियां या पत्ते रखते हुए भी देखा गया है। यह देखने में किसी प्रकार की रस्म जैसा लगता है।
वैज्ञानिकों ने कौवों के इस व्यवहार को Crow Thanatology नाम दिया है, जो यह समझने में सहायक होता है कि कौवे, किसी साथी की मौत को कैसे समझते हैं। उससे क्या और कैसे सीखते हैं।












