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जानलेवा हमले के बाद भी एफआईआर नहीं, एसपी के दरबार पहुंचा पूरा परिवार

आलापुर (अम्बेडकर नगर)।तहसील आलापुर अंतर्गत थाना राजेसुल्तानपुर क्षेत्र के खरखांव (खरुवावं) गांव में जमीनी विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। लाठी-डंडों, धारदार हथियारों, ईंट-पत्थरों और तमंचे की बट से हुए कथित हमले में आधा दर्जन लोग घायल हो गए। पीड़ित परिवार का आरोप है कि गंभीर चोटों और मेडिकल परीक्षण के बावजूद स्थानीय पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया। न्याय की उम्मीद टूटने पर सोमवार को पूरा घायल परिवार पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और एसपी प्राची सिंह से निष्पक्ष जांच एवं एफआईआर दर्ज कराने की गुहार लगाई।
पीड़ित बब्लू पुत्र राम आधार के अनुसार पुरानी रंजिश और भूमि विवाद को लेकर गांव के दबंगों ने उनके परिवार पर सुनियोजित हमला किया। आरोप है कि हमले में बब्लू, सहबीर पुत्र राम आधार तथा हरेंद्र पुत्र राम किशुन के सिर पर गंभीर चोटें आईं और वे लहूलुहान हो गए। पीड़ित पक्ष का कहना है कि हमलावरों की नीयत जान लेने की थी।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि बब्लू की पत्नी रीमा को घर के अंदर घसीटकर बेरहमी से पीटा गया। बीच-बचाव करने पहुंचीं मनपत्ती देवी और हर्षित को भी नहीं बख्शा गया। घटना में कई लोगों को गंभीर चोटें आईं।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि हमलावरों ने एक वाहन में तोड़फोड़ की और बाद में झूठे मुकदमे में फंसाने की नीयत से वाहन की डिग्गी में अवैध तमंचा रख दिया। जान बचाकर निकले पीड़ितों ने तत्काल डायल-112 पर सूचना दी, लेकिन उनका आरोप है कि समय रहते प्रभावी पुलिस सहायता नहीं मिली।
घायलों का उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जहांगीरगंज में कराया गया, जहां उनका मेडिकल परीक्षण भी हुआ। इसके बाद पीड़ित पक्ष तहरीर लेकर राजेसुल्तानपुर थाने पहुंचा, लेकिन आरोप है कि मुकदमा दर्ज करने के बजाय थानाध्यक्ष ने उन्हें डांट-फटकार कर वापस भेज दिया। इतना ही नहीं, सहबीर को हिरासत में लेकर शांति भंग की आशंका में धारा 151 के तहत चालान कर दिया गया।
पीड़ित परिवार का कहना है कि दूसरी ओर आरोपी पक्ष की तहरीर पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर ली गई, जबकि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उनकी शिकायत को नजरअंदाज किया गया। इससे स्थानीय पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सोमवार को घायल परिवार पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और एसपी प्राची सिंह को शिकायती पत्र एवं मेडिकल रिपोर्ट सौंपकर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, निष्पक्ष जांच कराने और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। पीड़ितों के अनुसार पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
गंभीर चोटों और मेडिकल रिपोर्ट के बावजूद एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई?
फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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