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पुरानी बस्ती इलाके में मंगलवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने एक बार फिर “गंगा-जमुनी तहज़ीब” की जीवंत तस्वीर पेश कर दी। मोहर्रम की सातवीं का जुलूस और आखिरी बड़ा मंगलवार का धार्मिक आयोजन एक ही दिन होने के बावजूद पूरा क्षेत्र श्रद्धा, सौहार्द और अनुशासन की मिसाल बन गया। श्रद्धा और आस्था का संगम बना पूरा दिन दिन की शुरुआत मोहर्रम के जुलूस से हुई, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने हिस्सा लिया। वहीं दूसरी ओर बड़े मंगलवार के अवसर पर हनुमान भक्तों ने पूजा-अर्चना और भंडारे का आयोजन किया। दोनों आयोजनों के बीच किसी तरह का टकराव या अव्यवस्था न हो, इसके लिए प्रशासन ने पहले से ही व्यापक तैयारी कर रखी थी। हर मोड़ पर दिखा भाईचारा, एक-दूसरे के आयोजनों में शामिल हुए लोग सबसे खास बात यह रही कि दोनों समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे के कार्यक्रमों में खुलकर भागीदारी की।
कहीं शरबत वितरण चल रहा था तो कहीं प्रसाद और भंडारे में लोगों की भीड़ नजर आ रही थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह दृश्य सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आपसी सम्मान और सामाजिक एकता का उदाहरण था। थानाध्यक्ष शशांक शेखर राय की सक्रिय भूमिका बनी चर्चा का केंद्र पूरे आयोजन के दौरान पुरानी बस्ती थानाध्यक्ष शशांक शेखर राय की मौजूदगी और सक्रियता की हर ओर चर्चा रही। सुबह से लेकर देर रात तक वे जुलूस मार्ग, भंडारा स्थल और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी करते रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने केवल कानून-व्यवस्था संभालने का काम नहीं किया, बल्कि संवाद और समन्वय के जरिए माहौल को पूरी तरह शांत बनाए रखा। अफवाहों पर रोक, समन्वय से संभली व्यवस्था पुलिस टीम ने हर छोटे-बड़े बिंदु पर नजर रखी ताकि किसी तरह की अफवाह या गलतफहमी माहौल को प्रभावित न कर सके। थानाध्यक्ष ने दोनों समुदायों के आयोजकों से लगातार संवाद बनाए रखा और सभी कार्यक्रम तय समय व मार्ग के अनुसार संपन्न कराए। भंडारों और सेवा कार्यों ने बढ़ाया सौहार्द इस मौके पर कई जगहों पर शरबत वितरण और भंडारे आयोजित किए गए। पट्टू बाबा अन्नपूर्णा रसोई की ओर से मोहर्रम जुलूस में शामिल लोगों को शरबत, ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक और प्रसाद वितरित किया गया। वहीं बड़े मंगलवार के भंडारे में भी मुस्लिम समुदाय के लोगों का सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया, जिससे सामाजिक एकता और मजबूत हुई। स्थानीय लोगों की राय: “ऐसा माहौल हमेशा बना रहे” क्षेत्र के लोगों ने कहा कि यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया। लोगों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन और समाज की यह साझेदारी आगे भी ऐसे ही सौहार्दपूर्ण माहौल को बनाए रखेगी। पुरानी बस्ती में मंगलवार को जो दृश्य दिखा, उसने एक बार फिर साबित किया कि सही समन्वय और संवेदनशील नेतृत्व के साथ अलग-अलग आस्थाएं भी एक ही रास्ते पर शांति और भाईचारे का संदेश दे सकती हैं।
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बस्ती में गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल:मोहर्रम और बड़े मंगलवार एक साथ, पुराने शहर में दिखा भाईचारा
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