नई दिल्ली । विदेशी फंड को लेकर विपक्ष के विरोध के बीच सरकार फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) ला सकती है। इस बिल में सरकार विदेशी फंडिंग पर नए नियम लागू करने का प्रावधान ला सकती है। इस दौरान सदन में एफसीआरए बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच हंगामा देखने को मिल सकता है। बता दें कि एनडीए सरकार पिछले दिनों एंटी पेपर लीक और वंदे मातरम् बिल जैसे बिलों को सफलतापूर्वक पास करवा चुकी है।
लोकसभा में दोबारा पेश होगा FCRA बिल
केंद्र सरकार ने इस बिल को पहले 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन विपक्ष और सिविल सोसाइटी के भारी विरोध के कारण इसे टालना पड़ा था। विपक्षी पार्टियां इस बिल का विरोध कर रही हैं। अब सरकार इसे संसद में दोबारा लाने की तैयारी कर रही है।
बिल में कुछ बदलाव कर सकती है सरकार
सरकार का इरादा संसद के इसी सत्र में इस बिल को पास कराने का है। विपक्ष के भारी विरोध और चिंताओं को देखते हुए सूत्रों का कहना है कि सरकार पारित कराने से पहले बिल में कुछ बदलाव भी कर सकती है। जहां एक तरफ विपक्ष इसे खतरनाक बता रहा है तो वहीं सरकार का कहाना है कि यह कानून केवल उन लोगों पर नकेल कसेगा जो विदेशी फंड का गलत इस्तेमाल करते हैं या इसके जरिए अवैध धर्म परिवर्तन में शामिल हैं।
क्या होता है FCRA?
FCRA का पूरा नाम फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (Foreign Contribution Regulation Act) यानी विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम है। यह भारत का वह कानून है जो देश में मिलने वाले विदेशी फंड और दान को नियंत्रित करता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विदेशी पैसे का गलत इस्तेमाल देश की सुरक्षा या शांति के खिलाफ न हो। विदेशी फंड के लेनदेन में खामियों को दुरुस्त करने के लिए सरकार इस कानून में संशोधन करना चाहती है। अमित शाह के नेतृत्व वाले गृह मंत्रालय की ओर से संचालित यह कानून विदेशी चंदे पर रोक नहीं लगाता है। इसके बजाय, यह तय करता है कि कौन इसे प्राप्त कर सकता है, इसका हिसाब-किताब कैसे रखा जाना चाहिए और इसे कहां खर्च किया जा सकता है।
सरकार का क्या कहना है?
सरकार का कहना है कि कानून में बदलाव का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी पैसा भारत में अधिक पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली के माध्यम से आए, ताकि इसे राष्ट्रीय हित, लोकतांत्रिक संस्थानों या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक मानी जाने वाली गतिविधियों की ओर न मोड़ा जा सके। FCRA, यह सुनिश्चित करता है कि विदेशी पैसा भारत में एक रजिस्टर्ड, जवाबदेह और पारदर्शी चैनल के माध्यम से आए, साथ ही हजारों संगठनों को वैध, प्रभावशाली काम करने में सक्षम बनाता है। सरकार का तर्क है कि ऐसा सिर्फ भारत में ही नहीं हो रहा है। गृह मंत्रालय ने अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में विदेशी प्रभाव से जुड़े रजिस्ट्रेशन सिस्टम का हवाला देते हुए कहा है कि इस तरह की निगरानी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है।
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