हमीरपुर । उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के जरिया थाना क्षेत्र के ग्राम परछा में 16 वर्ष पूर्व एक दलित व्यक्ति पर लोहे की धारदार सरिया से जानलेवा हमला करने और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने के मामले में गुरुवार को न्यायालय ने फैसला सुनाया है।
अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) रणबीर सिंह की कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई है। मामला 19 जून 2010 का है, जब वादी प्रागीलाल के पुत्र राजेश के साथ दुकान पर शराब पी रहे जयप्रकाश और ठाकुरदास ने मारपीट की थी। अगले दिन जब प्रागीलाल इसकी रिपोर्ट दर्ज कराने चौकी जा रहे थे, तब रास्ते में जयप्रकाश ने उन्हें रोककर रिपोर्ट न करने की धमकी दी। बात न मानने पर जयप्रकाश ने लोहे की धारदार छड़िया से प्रागीलाल पर जानलेवा हमला कर दिया और मारते-मारते वापस गांव लाया। मौके पर मौजूद गवाह प्रकाश ने बीच-बचाव कर प्रागीलाल की जान बचाई।
न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों जयप्रकाश और ठाकुरदास को भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 324, 504, 506 और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3 (1) 10 के तहत दोषी पाया। कोर्ट ने दोनों को एससी/एसटी एक्ट में अधिकतम 04 वर्ष के सश्रम कारावास और 4,000 रुपये अर्थदंड सहित अन्य धाराओं में भी अलग-अलग कारावास व जुर्माने की सजा सुनाई है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। इसके साथ ही कोर्ट ने दोषियों द्वारा पीड़ित पक्ष को क्षतिपूर्ति के रूप में 25,000 रुपये की धनराशि देने का भी आदेश जारी किया है। मामले की विवेचना तत्कालीन सीओ सतीश कुमार सिंह ने की थी। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक विजय सिंह ने पैरवी की, जबकि कांस्टेबल पंकज कुमार ने पैरोकार की भूमिका निभाई।












