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आ रहा है गॉडजिला अल नीनो, इतना शोर क्यों मचा है? वजहें समझिए

अमेरिका में मौसम वैज्ञानिकों ने एक बहुत बड़ी चेतावनी जारी की है। इस हफ्ते के गुरुवार यानी 11 जून को समुद्र में एक बहुत बड़ा बदलाव शुरू होने वाला है। इस बदलाव को ‘गॉडजिला’ या ‘सुपर’ अल नीनो नाम दिया गया है। सरकारी संस्था ‘नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’ (NOAA) के ‘क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर’ के वैज्ञानिक इसकी आधिकारिक घोषणा करेंगे। यूनाइटेड नेशंस (UN) के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने एक वीडियो में चेतावनी दी है कि इसके आने की संभावना 90% पक्की है। उन्होंने कहा कि दुनिया को इसे एक गंभीर चेतावनी की तरह लेना चाहिए क्योंकि यह पहले से गर्म होती दुनिया में आग में घी डालने का काम करेगा। इसका असर अमेरिका के मौसम पर पड़ेगा जिससे वहां अचानक बहुत भारी बाढ़, सूखा और खतरनाक तूफान आ सकते हैं।

अल नीनो मौसम में अपने आप होने वाला एक बदलाव है। इसमें पैसिफिक ओशन के बीच और पूर्वी हिस्से में पानी ऊपर से आम दिनों से बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है। स्पैनिश भाषा में ‘अल नीनो’ का मतलब ‘छोटा बच्चा’ या ‘क्राइस्ट चाइल्ड’ होता है। सबसे पहले साल 1600 के दशक में साउथ अमेरिका के मछुआरों ने इसे नोटिस किया था। उन्होंने क्रिसमस के दिनों में प्रशांत महासागर में अचानक गर्म पानी देखा था इसलिए उन्होंने इसका नाम यह रखा। इस पूरे प्रोसेस को आधिकारिक रूप से ‘अल नीनो, सदर्न ऑसिलेशन’ या ‘ENSO’ कहा जाता है। यह बदलाव प्रशांत महासागर में इक्वेटर के पास गर्म और ठंडे पानी के बीच होता रहता है। जब पानी ठंडा होता है तो उसे ‘ला नीना’ कहते हैं।

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इस बार यह कितना ताकतवर हो सकता है?

इस साल अल नीनो वाले इलाके में समुद्र का तापमान इस मौसम के हिसाब से अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। 31 मई से 5 जून के बीच वहां का पानी लगभग 1 डिग्री फारेनहाइट गर्म हो गया। यह तापमान पिछले 30 सालों के आम तापमान से लगभग 3 डिग्री ज्यादा गर्म था। कंप्यूटर मॉडल्स दिखा रहे हैं कि इस साल के खत्म होने तक यहां का पानी 5 डिग्री फारेनहाइट से भी ज्यादा गर्म हो सकता है। बरकेले अर्थ के वैज्ञानिक रॉबर्ट रोहडे ने बताया कि लगभग हर कंप्यूटर मॉडल अल नीनो के आने का इशारा कर रहा है। कुछ मॉडल्स इसे धीमा तो कुछ बहुत ताकतवर दिखा रहे हैं। कुछ मॉडल्स ने तो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड टूटने की बात भी कही है हालांकि रॉबर्ट रोहडे को लगता है कि ऐसा होना मुश्किल है।

वैज्ञानिक और मीडिया इसको सुपर या गॉडजिला अल नीनो बोल रहे हैं। सुपर शब्द का इस्तेमाल तब होता है जब प्रशांत महासागर का तापमान कई महीनों तक आम तापमान से 3.6 डिग्री फारेनहाइट ज्यादा रहता है। साल 1950 के बाद से अब तक सिर्फ चार बार ऐसा हुआ है। सबसे आखिरी बार ऐसा बड़ा बदलाव साल 2015 और 2016 के बीच देखा गया था। यूनाइटेड नेशंस की मौसम एजेंसी (WMO) का कहना है कि इस गर्मियों में अल नीनो शुरू होने की संभावना 80% है और इसके नवंबर तक या उससे आगे चलने की उम्मीद 90% या उससे ज्यादा है।

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अमेरिका के मौसम पर इसका क्या असर होगा?

एनओऐऐ के मुताबिक, अल नीनो प्रशांत महासागर में छुपी हुई गर्मी को हवा में छोड़ देता है। इस वजह से पूरी दुनिया का औसत तापमान कुछ समय के लिए बढ़ जाता है। सरकारी वैज्ञानिक सर्दियों के मौसम का अंदाजा लगाने के लिए सबसे पहले इसी बदलाव को देखते हैं क्योंकि इसका सबसे ज्यादा असर ठंड के महीनों में होता है।

‘क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर’ के मुताबिक, अल नीनो की सर्दियों में अमेरिका का निचला यानी दक्षिणी हिस्सा आम दिनों से ज्यादा गीला रहता है और वहां ज्यादा बारिश होती है। वहीं अमेरिका का उत्तरी हिस्सा सूखा रहता है और वहां कम बारिश होती है। एनओऐऐ के तूफान विश्लेषक मैथ्यू रोजेंक्रान्स ने बताया कि अल नीनो के दौरान पूरे अमेरिका में सर्दियों का मौसम आम तौर पर गर्म रहता है खास कर पैसिफिक नॉर्थवेस्ट से लेकर ग्रेट लेक्स तक के इलाकों में।

यह गर्मी वेस्ट कोस्ट और साउथ-ईस्ट तक भी फैल सकती है पर वहां का असर अभी पूरी तरह पक्का नहीं है। ‘सीवियर वेदर यूरोप’ के मुताबिक, अगर यह सुपर अल नीनो होता है तो मौसम में बहुत बड़े बदलाव आएंगे जिससे आम मौसम अचानक भयानक बाढ़, भारी सूखे और खतरनाक तूफानों में बदल सकता है।

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