केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा उर्फ जेपी नड्डा ने बुधवार की रात बीजेपी कार्यालय में छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले का न तो राजनीतिकरण किया जाना चाहिए और न ही सियासी लाभ उठाया चाहिए। उन्होंने छात्रों के मुद्दे को गहन समस्या बताया और कहा कि इस पर गहनता से चर्चा करने की जरूरत है। केंद्रीय मंत्री ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया और उन पर छात्रों के मुद्दे पर सियासी फायदा लेने का आरोप लगाया।
नड्डा ने कहा, ‘हमें आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर इस पर चर्चा करनी चाहिए। चर्चा के लिए सबसे अच्छा मंच संसद है और हम इस चर्चा के लिए तैयार हैं। इस पर विस्तार और गहनता से चर्चा होनी चाहिए। पेपर लीक की वजहें क्या हैं? इसमें कौन-कौन शामिल हैं और केंद्र सरकार ने इस पर क्या कदम उठाए हैं? जब भी पेपर लीक का मामला सामने आया, तो हमने इसे कैसे संभाला और दूसरी सरकारों को इसे कैसे संभालना चाहिए? हमें किस बात पर गहराई से विचार करके समाधान निकालना चाहिए ताकि लाखों छात्रों के साथ अन्याय न हो?’
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जेपी नड्डा ने आगे कहा, ‘विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद में एक प्रस्तुतीरण दिया। इसमें उन्होंने लगभग 150 पेपर लीक की चर्चा की। यह जांच का विषय है। एक जिम्मेदार सरकार है… निश्चित रूप से जांच के साथ जनता और देश के सामने दूध का दूध और पानी का पानी रखा जाएगा।’
नड्डा ने कहा कि पेपर लीक के हर मुद्दे पर संसद में चर्चा होगी। सरकार विस्तार से चर्चा करने को तैयार है। विपक्ष को अपनी बात रखनी चाहिए और सरकार उसका जवाब देगी। उन्होंने आगे भी दोहराया, ‘मैं एक बार फिर आपको भरोसा दिलाता हूं कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार एक जिम्मेदार और संवेदनशील सरकार है। वह हमेशा चाहती है कि संसद में सभी मुद्दों पर चर्चा हो और हम उस चर्चा के लिए तैयार हैं।’
आईसीयू में वांगचुक… उनका हालचाल जाना: नड्डा
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ हुई मुलाकात पर जेपी नड्डा ने कहा, ‘हम उनका हाल-चाल जानने गए थे। उन्हें सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया। वे आईसीयू में थे, इसलिए वहां का माहौल बहुत सीमित था। अपनी मुलाकात के दौरान हमने उनके स्वास्थ्य और हाल-चाल के बारे में पूछा। हमने उनसे अपना अनशन तोड़ने और मुख्यधारा में शामिल होने व बच्चों को सही दिशा में मार्गदर्शन करने का आग्रह किया। हमारी सरकार सभी मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है और हमेशा उनका समाधान करने के लिए तत्पर है। आज उन्होंने मुझे एक खुला पत्र लिखा। हम उस पत्र का जवाब देंगे और जवाब देने के बाद यह सुनिश्चित करेंगे कि बातचीत आगे बढ़े।’
सीजेपी के साथ अच्छे माहौल में हुई चर्चा
सीजेपी प्रतिनिधियों के साथ हुई मुलाकात पर जेपी नड्डा ने कहा कि बातचीत बहुत अच्छे माहौल में हुई। हमने उनकी बातें बहुत शांति से सुनीं। मैंने उनसे यह भी कहा कि अगर वे अपनी बातें लिखकर दें तो बेहतर होगा। उन्होंने वे सभी बातें लिखकर दे दी हैं। मैंने उनसे यह भी कहा कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं। जब भी वे चाहें, हम इस मामले पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। आज हमारी कोई बैठक नहीं हुई।
कश्मीर से झारखंड तक… नड्डा ने गिनाए विपक्ष शासित राज्यों में पेपर लीक
जेपी नड्डा ने जम्मू-कश्मीर में सर्विस सिलेक्शन बोर्ड परीक्षा लीक का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि वहां तो कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार है। इसी तरह हिमाचल प्रदेश में स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड में पेपर लीक हुआ, जहां कांग्रेस की सरकार है। झारखंड में भी जेएसी में हिंदी और साइंस के पेपर लीक हुए, जहां कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार है।
नड्डा ने आगे कहा कि तेलंगाना में इंटरमीडिएट का भाषा का पेपर लीक हुआ और वहां भी हम जानते हैं कि सरकार को कांग्रेस और सीपीआई का समर्थन प्राप्त है। तेलंगाना में एसएससी में भी भाषा का पेपर लीक हुआ। तमिलनाडु में बीएड का पेपर लीक हुआ, उस समय वहां भी विपक्षी पार्टी की सरकार थी।
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पश्चिम बंगाल में पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ। उस समय वहां टीएमसी की सरकार थी। पंजाब में पंजाब सबऑर्डिनेट सर्विस सिलेक्शन बोर्ड की ग्रुप बी परीक्षा में पेपर लीक और गड़बड़ियां हुईं। इसी तरह केरल में 26 पीएससी परीक्षा के पेपरों में अनियमितताएं हुईं। कर्नाटक में जहां कांग्रेस की सरकार है, वहां प्रीपरेटरी बोर्ड परीक्षा में पेपर लीक हुआ। पीयूसी का पेपर लीक हुआ। यह काफी लंबी लिस्ट है, जिस पर हम सही समय आने पर चर्चा करेंगे।
‘राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं राहुल गांधी’
उन्होंने आगे कहा, ‘मैं विपक्ष के नेता राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि आप इतने चुनिंदा क्यों हैं? आपने यूपीए और यूपीए समर्थित सरकारों के बारे में चर्चा क्यों नहीं की? आपने उनसे दूरी क्यों बना ली है? इससे साफ पता चलता है कि आपका मकसद छात्रों का कल्याण नहीं है। शिक्षा में सुधार करना, शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करना और छात्रों को न्याय दिलाना – इसमें आपकी कोई दिलचस्पी नहीं है। आप छात्रों के मुद्दों और मांगों से राजनीतिक फायदा उठाना चाहते हैं। आप राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।’












