लखनऊ। लद्दाख के लेह में वैशाख बुद्ध पूर्णिमा पर रविवार को आस्था, अध्यात्म और वैश्विक विमर्श का भव्य संगम दिखा। महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर में आयोजित बौद्ध सम्मेलन’ में उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ‘भगवान बुद्ध की पावन भूमि उत्तर प्रदेश से प्रारंभ हुई तथागत की ‘बोधि यात्रा’ आज सीमाओं से परे शांति का संदेश सम्पूर्ण विश्व में प्रसारित कर रही है।
1 से 14 मई तक आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि ‘हिमालयी क्षेत्र लेह की धरती पर भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का आगमन ऐतिहासिकता के साथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के नए युग का प्रारंभ भी है। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर स्थित पिपरहवा से वर्ष 1898 में प्राप्त छठी शताब्दी ईसा पूर्व के ये अवशेष, मूर्तियां एवं पांडुलिपियां भगवान बुद्ध की उपस्थिति और उनकी सार्वभौमिकता के सशक्त प्रतीक हैं।
पखवाड़े भर आयोजित दुर्लभ प्रदर्शनी देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को विशेष अनुभव प्रदान करेंगे।’ बौद्ध विरासत के संरक्षण और संवर्धन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में ‘बौद्ध सर्किट’ का तेजी से विकास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इन सतत प्रयासों का ही परिणाम है कि वर्ष 2025 में प्रदेश ने पर्यटन के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की और 156 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2022 में 22.40 लाख, 2023 में 47 लाख, 2024 में 61.47 लाख और 2025 में लगभग 82 लाख पर्यटकों का आगमन इस लगातार बढ़ती लोकप्रियता और विश्वास को दर्शाता है।’
पर्यटन मंत्री ने कहा कि ‘उत्तर प्रदेश सरकार भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र स्थलों के समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं के जरिए प्रदेश के बौद्ध स्थलों के विकास पर लगभग 226.08 करोड़ रुपए का निवेश किया जा रहा है। बौद्ध सम्मेलन’ में शामिल सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से वैश्विक स्तर पर बौद्ध विरासत को नई पहचान मिलती है।












