लखनऊ। सरकार की मंशा है कि गांव की समस्याओं का समाधान गांव में ही हो। गांव से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ के आवास तक जन समस्या सुनी भी जा रही है लेकिन समाधान शायद नहीं हो रहा है। तहसीलों में भी वरिष्ट अधिकारियों की मौजूदगी में समाधान दिवस आयोजित किया जा रहा है। गजब के हालात दिख रहे है कोई आत्म दाह की कोशिश तो कोई गश खाकर बेहोश हो रहा है।
मालूम हो कि मुख्यमंत्री स्वयं लखनऊ और गोरखपुर में जनता दरबार लगा रहे हैं। दीप्ति सीएम सहित जिलों में तैनात लगभग सभी अधिकारी भी जनता दरबार लगा रहे हैं। आखिरकार समस्याओं का समाधान क्यों नहीं हो रहा है। हाल में राजधानी लखनऊ की सभी तहसीलों में सम्पूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी विशाख जी लाव लश्कर के साथ सरोजनी नगर तहसील पहुंचे।
इस दौरान एक महिला जमीन के एक मामले को बताते हुए बेहोश होकर गिर गई। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसे देखने स्वयं डीएम विशाख जी गए। इसके अलावा कई मामले ऐसे आए जो कई माह से दौड़ लगा रहे हैं। इसी तरह बीकेटी में जमीन के ही मामले को लेकर एसडीएम के सामने ही एक फरियादी ने आत्मदाह करने की कोशिश की। इसी तरह मोहनलाल गंज में एक महिला अपने पति का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 6 माह से तहसील के चक्कर लगा रही है। इस तरह के कई मामले ऐसे रहे जो हर किसी को हैरान करने वाले थे।
डीएम कार्यालय के अनुसार दो मई को समाधान दिवस पर तहसीलों में कुल 640 मामले आए जिसमें से महज 139 का ही समाधान हो सका। इस तरह समाधान दिवस में 25 फीसदी मामलों की भी सुनवाई नहीं हो रही है। जबकि सीएम के स्पष्ट आदेश है कि जिलों में ही जन समस्याओं का समाधान किया जाए।












