हमीरपुर। बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल हादसे से सुरक्षित निकले तीन मजदूरों के लिए बृहस्पतिवार की रात जिंदगी की सबसे भयावह रात बन गई। कुछ ही मिनटों में उनके सामने छह साथी मौत के मुंह में समा गए, जबकि वे खुद पुल के टूटे हिस्से पर करीब 20 मीटर की ऊंचाई पर पूरी रात जिंदगी और मौत के बीच फंसे रहे।हादसे में सुरक्षित बचे राजेश निषाद, कल्लू यादव और अवधेश निषाद ने बताया कि देर रात मौसम अचानक खराब हो गया था। तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गई थी। उस समय पुल पर निर्माण कार्य चल रहा था और कई मजदूर अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे थे। आंधी तेज होने पर कुछ मजदूर सुरक्षा के लिए पुल के स्लैब के बीच जाकर बैठ गए। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में पूरा ढांचा मौत का मंजर बन जाएगा।
पहली बार मौत को इतनी नजदीक से देखा
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रात करीब 12 बजे के बाद हवा की रफ्तार लगातार बढ़ने लगी। कुछ देर बाद पुल और पिलर में कंपन महसूस होने लगा। मजदूर स्थिति को सामान्य समझ रहे थे, लेकिन अचानक एक जोरदार धमाके के साथ पुल का हिस्सा ढह गया। देखते ही देखते कई मजदूर और सुरक्षा कर्मी मलबे के नीचे दब गए।राजेश निषाद ने बताया कि हादसे के बाद चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। बारिश, तेज हवा और अंधेरे के कारण कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था।

उन्होंने कहा कि पहली बार मौत को इतनी नजदीक से देखा। ऐसा लग रहा था कि शायद अब हम भी जिंदा नहीं बचेंगे।कल्लू यादव के लिए यह हादसा और भी दर्दनाक साबित हुआ। उन्होंने बताया कि हादसे में उनके सगे भतीजे गंगाचरण और रिश्तेदार सभाजीत की मौत हो गई। दोनों कुछ दिन पहले ही काम पर आए थे। हादसे से पहले सभी लोग साथ बैठकर मौसम शांत होने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन अचानक पुल का हिस्सा टूट गया और सब कुछ खत्म हो गया।
फंसे तीनों मजदूरों ने पूरी रात भय के साये में बिताई
हादसे के बाद पुल के टूटे हिस्से पर फंसे तीनों मजदूरों ने पूरी रात भय के साये में बिताई। अवधेश निषाद ने बताया कि बिजली और जनरेटर बंद होने से चारों ओर घना अंधेरा छा गया था। नीचे उतरने का कोई रास्ता नहीं था और हर पल यह डर सता रहा था कि कहीं पुल का बचा हुआ हिस्सा भी न गिर जाए।राजेश निषाद ने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब तीनों ने नदी में छलांग लगाकर जान बचाने के बारे में सोचा, लेकिन नीचे की स्थिति देखकर उन्होंने यह विचार छोड़ दिया। उन्हें लगा कि कूदने पर भी मौत तय है और ऊपर रुकने पर भी खतरा बना हुआ है। ऐसे में उन्होंने मदद का इंतजार करना ही बेहतर समझा।रातभर पुलिस, प्रशासन, फायर सर्विस और एसडीआरएफ की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी रहीं। नीचे चल रहे रेस्क्यू अभियान को देखकर फंसे मजदूरों को उम्मीद मिलती रही कि उन्हें बचा लिया जाएगा।

सूचना मिलने के बाद विशेष रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची
एसडीआरएफ के अधिकारियों के अनुसार सूचना मिलने के बाद विशेष रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। पुल का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के कारण ऊपर पहुंचना आसान नहीं था। जवानों ने रस्सी की सीढ़ियों और विशेष उपकरणों की मदद से पहले रास्ता बनाया और फिर बेहद सावधानी के साथ तीनों मजदूरों को सुरक्षित नीचे उतारा।घंटों चले अभियान के दौरान मलबे में दबे लोगों की तलाश भी जारी रही। रेस्क्यू टीम ने छह शव बरामद किए। जब सुबह तीनों मजदूर सुरक्षित नीचे आए तो वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन अपने साथियों को खोने का दर्द उनके चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा था।गौरतलब है कि कुरारा थाना क्षेत्र में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का पिलर और स्लैब तेज आंधी के दौरान ढह गया था। हादसे में चार मजदूरों और दो सुरक्षा कर्मियों की मौत हो गई, जबकि तीन मजदूरों को सुरक्षित बचा लिया गया। घटना के बाद पुल निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।












