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बस्ती में जिला उपभोक्ता फोरम ने एक निजी अस्पताल को गर्भवती महिला के ऑपरेशन में गंभीर लापरवाही बरतने का दोषी ठहराया है। फोरम ने अस्पताल प्रबंधन को 5.30 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। इसमें पीड़िता को चार लाख रुपये उपचार व्यय और 1.30 लाख रुपये मानसिक व शारीरिक क्षति के मुआवजे के रूप में देने के निर्देश शामिल हैं। मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष न्यायाधीश अमरजीत वर्मा और सदस्य अजय प्रकाश सिंह ने की। यह परिवाद मुंडेरवा थाना क्षेत्र के रानीपुर गांव निवासी सरिता पत्नी कृष्णा ने अधिवक्ता शिव कुमार त्रिपाठी के माध्यम से दाखिल किया था। परिवाद के अनुसार, सरिता को प्रसव के लिए 14 अगस्त 2021 को शहर स्थित शंभूनाथ शुक्ला एस.एस. मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया था। उसी दिन ऑपरेशन के जरिए बच्चे का जन्म हुआ, लेकिन नवजात ने कुछ ही देर बाद दम तोड़ दिया। महिला को 23 अगस्त को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। पीड़िता ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के बाद से ही उसके पेट और नाभि के आसपास लगातार असहनीय दर्द बना रहा। अस्पताल के चिकित्सकों सहित कई अन्य डॉक्टरों से उपचार और जांच कराने के बावजूद उसे राहत नहीं मिली। बाद में हालत बिगड़ने पर सरिता को एम्स दिल्ली में भर्ती कराया गया। वहां 18 दिसंबर 2021 को हुए ऑपरेशन में महिला के पेट से तौलिया का एक टुकड़ा निकाला गया। एम्स की डिस्चार्ज समरी में भी पूर्व ऑपरेशन में लापरवाही का उल्लेख किया गया है। मामले में अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही से इनकार किया था। हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फोरम ने अस्पताल प्रबंधन को दोषी मानते हुए पीड़िता के पक्ष में फैसला सुनाया।
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अस्पताल पर 5.30 लाख का जुर्माना, नवजात की मौत:महिला के ऑपरेशन में लापरवाही, पेट में छूटा तौलिया
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