इजी ब्रेड पोहा:महाराष्ट्र में आमतौर नाश्ते में पोहा बनाया जाता है। ब्रेड पोहा भी पोहे का ही एक रूप है जिसे ब्रेड और कुछ मसालों के साथ तैयार किया जाता है। ब्रेड पोहा झटपट तैयार हो जाता जिसे आप घर आने वाले मेहमानों के सामने तो परोस सकते हैं साथ ही सुबह के नाश्ते या फिर शाम की चाय के साथ भी खा सकते हैं। आप चाहे तो इसे बच्चों के टिफिन में भी पैक कर सकते हैं।इजी ब्रेड पोहा बनाने के लिए सामग्री: इसमें चिड़वे की जगह ब्रेड का इस्तेमाल किया है, कढ़ीपत्ता, साबुत लाल मिर्च, मूंगफली, मटर और नींबू का रस डालकर इसे तैयार किया जाता है। इस स्वादिष्ट पोहे को आप सिर्फ 25 मिनट में तैयार कर सकते हैं।
कुल समय35 मिनट
तैयारी का समय15 मिनट
पकने का समय20 मिनट
कितने लोगों के लिए2
आसान
इजी ब्रेड पोहा की सामग्री2 टेबल स्पून तेल1/8 टी स्पून हींग5-6 कढ़ीपत्ता2 साबूत लाल मिर्च1 कप मटर (उबले हुए)1/2 कप मूंगफली, रोस्टेड1 टी स्पून हल्दी पाउडर1 टी स्पून नमक4 ब्रेड स्लाइस, टुकड़ों में कटा हुआ2 हरी मिर्च1 टेबल स्पून नींबू का रस1/2 कप हरा धनियानारियल, कद्दूकस
इजी ब्रेड पोहा बनाने की विधि
1.एक पैन में थोड़ा सा तेल डालकर गर्म करें।इजी ब्रेड पोहा2.जब तेल गर्म हो जाए तो उसमें हींग डालें।3.इसमें अब राई, कढ़ीपत्ता और साबूत लाल मिर्च डालें।इजी ब्रेड पोहा4.इन्हें थोड़ा सा भूनने के बाद इसमें मटर डालकर पकाएं।इजी ब्रेड पोहा5.अब इसमें भूनी हुई मूंगफली डालें और गोल्डन ब्राउन होने तक पकाएं।इजी ब्रेड पोहा6.इसमें हल्दी और नमक डालने के बाद ब्रेड के टुकड़े डालें।इजी ब्रेड पोहा7.हल्का सा पानी छिड़के और हरी मिर्च, नींबू का रस और हरा धनिया डालें।इजी ब्रेड पोहा8.कद्दूकस किए हुए नारियल से गार्निश करके सर्व करें।
अफीम की खेती से कितनी हो सकती है कमाई?
अफीम की खेती: अफीम की खेती भारत में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली फसलों में से एक मानी जाती है. इसकी वजह और सिर्फ इसकी कीमत नहीं, बल्कि इसके पीछे लागू सख्त सरकारी नियम भी है. भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहां सरकार की निगरानी में कानूनी तरीके से अफीम की खेती की जाती है. यही नहीं भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश माना जाता है, जहां कानूनी रूप से गम अफीम का उत्पादन किया जाता है. इसी अफीम से मार्फिन और कोडीन जैसी जरूरी दवाई बनाई जाती है, जिनका इस्तेमाल गंभीर दर्द और मेडिकल जरूरतों में होता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि 5 बीघा खेत में अफीम उगाने पर कितना खर्च आता है और फिर इससे कमाई कितनी होती है.
भारत में कहां होती है अफीम की खेती?
भारत में हर राज्य में अफीम की खेती की अनुमति नहीं है. इसके लिए केंद्र सरकार से लाइसेंस लेना जरूरी होता है. सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स हर साल कुछ इलाकों में ही अफीम की खेती की अनुमति देता है. फिलहाल मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में ही कानूनी रूप से अफीम की खेती होती है. राजस्थान के प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, झालावाड़, भीलवाड़ा और कोटा जैसे जिले अफीम उत्पादन के बड़े केंद्र माने जाते हैं. वहीं मध्य प्रदेश के मंदसौर और नीमच में भी इसके प्रमुख इलाके हैं. रिपोर्ट के अनुसार राज्य स्तर पर राजस्थान में सबसे ज्यादा अफीम की खेती होती है, जबकि जिलों में प्रतापगढ़ सबसे आगे माना जाता है.
5 बीघा खेत में कितना आता है खर्च?
अफीम की खेती सामान्य फसलों की तुलना में काफी संवेदनशील और मेहनत वाली मानी जाती है. इसकी बुवाई अक्टूबर-नवंबर में की जाती है. खेत की कई बार जुताई करनी पड़ती है और गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल करना होता है. इसके अलावा बीज, सिंचाई, मजदूरी, सुरक्षा और देखरेख पर भी बड़ा खर्च आता है. यह खर्च लगभगत लाखों रुपये तक हो सकता है, क्योंकि यह फसल पूरी तरह सरकारी निगरानी में होती है. इसलिए खेत की जांच और उत्पादन रिकॉर्ड भी लगातार देखा जाता है.












