अमेरिका बड़ी जंग की तैयारी में जुटा है। यही कारण है कि पेंटागन ने 1.5 ट्रिलियन डॉलर का बजट मांगा है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल से पहले अमेरिका में रक्षा मंत्री होता था। मगर ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद इस पद का नाम बदलकर युद्ध मंत्री कर दिया गया। यह भी एक संकेत है कि अमेरिका बड़ी जंग की तैयारी में है। अमेरिका के युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ अगले सप्ताह कैपिटल हिल जाएंगे। यहां हाउस और सीनेट के शीर्ष सांसदों से मिलेंगे और 1.5 ट्रिलियन डॉलर के बजट पर चर्चा करेंगे।
ट्रंप प्रशासन ने 2026 की तुलना में 455 बिलियन डॉलर यानी करीब 40 फीसद अधिक रक्षा बजट मांगा है। बजट के अलावा 200 बिलियन डॉलर का आपातकालीन फंड भी मांगा गया है। यह रकम ईरान के खिलाफ युद्ध में खर्च होगी। डोनाल्ड ट्रंप का तर्क है कि यह भारी भरकम रक्षा बजट अमेरिका के हित में होगा और ड्रीम मिलिट्री बनाने का सपना साकार करेगा। दस्तावेजों में बताया गया कि रक्षा बजट में इजाफा ताकत के माध्यम से शांति स्थापित करने के ट्रंप की नीति को आगे बढ़ाएगा। मतलब साफ है कि ट्रंप ताकत और धमकी के बल पर दुनिया को चलाने की मंशा रखते हैं।
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कार नहीं… हथियार बनाओ
अमेरिकी रक्षा विभाग ने कार कंपनियों से हथियार बनाने का अनुरोध किया है। ट्रंप ने ऑटोमोबाइल कंपनियों से हथियार निर्माण में अहम भूमिका निभाने को कहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने जनरल मोटर्स समेत कई कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की। बैठक में हथियार और अन्य सैन्य सामग्री के उत्पादन पर चर्चा हुई। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहली बार है जब अमेरिका कार कंपनियों से हथियार निर्माण करने का अनुरोध कर रहा है।
आठ देशों पर हमला… कहां रुकेंगे ट्रंप?
ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में अब तक आठ देशों पर हमला कर चुके हैं। तीन देश ऐसे हैं, जिन पर अमेरिकी सेना ने पहली बार हमला किया। यमन में हूती विद्रोहियों पर हमले का आदेश दिया। वेनेजुएला के जहाजों पर बमबारी करवाई। बाद में वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा भी कर लिया। इक्वाडोर में आतंकी संगठनों के खिलाफ अमेरिका ने सैन्य अभियान चलाया। 28 फरवरी को इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर इतिहास का सबसे भीषण हमला किया। पिछले साल 22 जून को भी अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर अटैक किया था।
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क्यूबा पर ट्रंप की निगाह
ईरान के बाद ट्रंप प्रशासन की निगाह क्यूबा पर टिकी है। अमेरिकी नौसेना ने पहले ही तेल नाकाबंदी कर रखी है। डोनाल्ड ट्रंप बार-बार कह चुके हैं कि अगला नंबर क्यूबा है। इसके बाद क्यूबा की सेना युद्धाभ्यास में जुट गई है। ट्रंप प्रशासन क्यूबा में छह दशक पुराने कम्युनिस्ट शासन को खत्म करने का प्लान बना रहा है। उधर, क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने कहा कि उनका देश अमेरिकी हमले के लिए तैयार है।
मलक्का पर ट्रंप की नजर क्यों?
ईरान युद्ध के बीच अमेरिका और चीन में भी तनाव बढ़ता जा रहा है। हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने धमकी दी कि अगर चीन ईरान को हथियार देगा तो उस पर 50 फीसद टैरिफ लगाया जाएगा। हाल ही में ईरान से तेल खरीदने पर भी रोक लगा दी। इस बीच अमेरिका ने इंडोनेशिया के साथ रक्षा सहयोग साझेदारी समझौता किया है। माना जा रहा है कि चीन को काउंटर करने के उद्देश्य से ही यह समझौता किया गया है।
समझौते के मुताबिक इंडोनेशिया अपने एयरस्पेस से अमेरिकी फाइटर जेट को उड़ान भरने की छूट देगा। इसका अमेरिका को फायदा यह होगा कि वह स्ट्रेट ऑफ मलक्का पर कड़ी निगाह रख सकता है। भविष्य में नाकेबंदी भी कर सकता है।
बता दें कि मलक्का स्ट्रेट मलय प्रायद्वीप और इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के बीच एक संकरा जलमार्ग है। ग्लोबल ट्रेड का लगभग एक चौथाई हिस्सा यही से गुजरता है। वहीं 33 फीसद तेल का परिवहन भी मलक्का के रास्ते होता है। यह चीन का प्रमुख व्यापारिक मार्ग है। अगर अमेरिका मलक्का की घेराबंदी करता है तो चीन के साथ टकराव की संभवाना बढ़ जाएगी।












