बहराइच जिले के मिहींपुरवा तहसील के ग्राम सभा वेलहन स्थित समय माता मंदिर में सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री की पूजा-अर्चना की। यह पूजा पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की मंगलकामना के लिए की गई। यह समय माता मंदिर क्षेत्र के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। ज्येष्ठ मास में मनाए जाने वाले इस व्रत को कई स्थानों पर “बरसाइत” या “बरसाइत पूजा” के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी सावित्री ने अपने तप, प्रेम और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। इसी आदर्श का स्मरण करते हुए महिलाएं यह व्रत रखती हैं, जिसका उद्देश्य पति की लंबी आयु, परिवार में सुख-शांति और वैवाहिक जीवन की मजबूती है। व्रत के दिन सुहागिन महिलाएं सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और सोलह श्रृंगार करती हैं। पूजा के लिए रोली, अक्षत, हल्दी, फूल, धूप, दीप, कपूर, लाल या पीला धागा, फल, मिठाई, भीगा चना, जल से भरा लोटा और सुहाग सामग्री जैसे पंखा, सिंदूर, चूड़ी आदि का उपयोग किया जाता है। महिलाओं ने बरगद के पेड़ के पास जाकर जल अर्पित किया, रोली, अक्षत और फूल चढ़ाए। इसके बाद, उन्होंने पेड़ के चारों ओर कच्चा धागा लपेटते हुए परिक्रमा की और अपने पतियों के दीर्घायु होने की कामना की।
वेलहन में सुहागिनों ने की वट सावित्री पूजा:समय माता मंदिर में पति की लंबी आयु के लिए की कामना
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